राष्ट्रवाद से राष्ट्रीय निर्माण : प्रो. गोविन्द जी पाण्डेय

राष्ट्रवाद से राष्ट्रीय निर्माण  : प्रो. गोविन्द जी पाण्डेय


शहीदों की शहादत और संघर्ष के बाद स्वतंत्रता का सूर्य भारत के भविष्य भाल पर आज के ही दिन 75 साल पहले उदित हुआ था। आज हम अपना 75वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। इतिहास से सीख कर भविष्य के निर्माण प्रक्रिया में लगे हुए हैं। यह नए भारत का निर्माण है। नया भारत जो संकल्प से सम्पन है। शक्ति का स्वप्न देखता है। कठिनाइयों में विचलित नहीं होता। कठिन फैसले निर्णायक रूप से लेता है। जो वैश्विक पटल पर नेतृत्व के लिए लालायित है। जिसमें नेतृत्व करने की क्षमता का उदय हुआ है। विश्व इस नए भारत के उभार को रेखांकित कर रहा है। भारत का विजय ध्वज आज सारे जहान में शान से फहरा रहा है। भारतीयों में एक नए भविष्य के निर्माण के लिए त्याग की भावना संचारित है। यह संभव हुआ है तो अभूतपूर्व नेतृत्व की वजह से। आज केंद्र में एक राष्ट्रवादी सरकार है। जिसके एजेंडे में भारत प्रथम है। जो अपने निर्णय राष्ट्रहित और भारतीय परंपरा व संस्कृति के अनुरूप लेती है और एक बार लिए गए फैसले से पीछे नहीं हटती। दरअसल राष्ट्रवाद राष्ट्र के प्रश्न पर पीछे हटने को निषेध बताता है। राष्ट्रवाद उस चेतना से संचारित है जिसमें राष्ट्र निर्माण के आगे समूह लाभ और व्यक्तिगत लाभ मायने नहीं रखता। व्यक्ति नहीं बल्कि राष्ट्रीय सामूहिकता जहाँ प्राथमिकता है।

वर्तमान में सरकार जिस गति से स्वालंबन की दिशा में बढ़ रही है। वह एक स्वालंबी भारत के भविष्य के निर्माण के लिए एक निर्णायक गति सिद्ध होगी। आज देखने में जो फैसले ग़लत लग रहे हैं वही फैसले भारत की शक्ति का आधार बनेंगे और एक समृद्ध भारत के निर्माण के कारक होंगे।

जिस तरह लंबित मामले केंद्र सरकार ने हाल किए हैं वह सराहनीय है। चाहे भौगोलिक रणनीति क्षेत्र के मामले हों। आंतरिक सुरक्षा का मामला हो। आंतरिक अशांति व नक्सल सशस्त्र विद्रोह हो, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर या उत्तर-पूर्व की शांति सुरक्षा हो। बंगाल की सीमा में घुसपैठ हो या विश्व पटल पर समर्थन जुटाने की रणनीति हो, हर दिशा में अथक परिश्रम से दुर्लभ लक्ष्य प्राप्त किये गए हैं।

आपदा के समय में भी सहायता निर्बाध रखी गई है। देश वासियों को जीविका और जीवन के लिए जिस तरह प्रयास किया गया है वह विश्व के लिए एक उदाहरण है। वैश्विक पटल पर इस प्रयास की प्रशंसा हुई है। भारत में महामारी की त्रासदी कितनी भयावह हो सकती थी यदि ऐसी मुस्तैदी न होती। राजनीति में आलोचना होती है, होगी भी। उसका स्वागत है। पर अपनी बात पूरे विश्वास से कहने में कोई हर्ज नहीं है। वर्तमान की केंद्र सरकार ने जिस तन्मयता से काम किया है उससे त्रासदी को नियंत्रित किया गया है। विश्व में जहां साधन और धन था। स्वास्थ्य सुविधाओं का सुदृण ढांचा था। जनसंख्या भी कम थी वहां महामारी ने महा प्रलय का खेल खेला है। वहाँ भी त्रासदियाँ अपने चरम पर रही हैं। उस दृष्टि से भारत में देशवासियों के सहयोग और विश्वास से सरकार ने एक अभूतपूर्व उद्यम किया है। समय और भारत की महान जनता उस कार्य का मूल्यांकन करेगी।

आज जब हम शहीदों की शहादत को नमन करते हुए आजादी मना रहे हैं तो हमें इस पर भी विचार करना होगा कि आज़ादी कैसे मनाई जाए। आजादी का जश्न मनाने का तरीका बस एक ही है। भारत के जन जन के उत्थान के, सर्वोदय का और पंडित दीनदयाल और गांधी जी के स्वप्न का जिसमें आख़री व्यक्ति के विकास की बात की गयी थी। उसके विकास के लिए बेधकड़ और निर्णायक फैसले किये जायें। भारत की सुरक्षा और समृद्धि से कोई समझौता न किया जाए। भारत के स्वर्णिम भविष्य और उज्ज्वल कल के लिए संकल्पित हो सामूहिक प्रयास किये जायें। आलोचना और लोकतांत्रिक संघर्षों में देश का हित सर्वोपरि रखा जाए।

भारत का विजयी मस्तक तब तक उन्नत है जब तक भारतीय नागरिक राष्ट्र के निर्माण को सर्वोपरि मानते हैं। उसके भविष्य के लिए श्रम और शक्ति लगा रहे हैं राष्ट्रीय चेतना को सर्वप्रथम मानते हैं। और राष्ट्रीय हित के आगे सभी हित द्वितीयक मानते हैं। भारत में इस समय सौभाग्य से एक निर्णायक सरकार है। जो भारत के भविष्य निर्माण और उसके विकास के लिए प्रयत्नशील है। भारतीय नागरिक उस राष्ट्रीय चेतना के साथ हैं इसलिए एक नव शक्ति और संकल्प का संचार दृश्यमान है।

आप सभी को आज़ादी की वर्षगांठ पर स्वतंत्रता दिवस की असीम बधाई एवं शुभकामनाएं। ईश्वर भारत के भविष्य को भव्य करें। शक्ति और समृद्धि का वरदान दें। जन जन को शांति और संपन्नता मिले। हमारा देश महान बने।

जय हिंद

प्रो. गोविंद जी पांडेय

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