देश में ही शरणार्थी बने पंडित इस्लामिक आतंकवाद का एक नमूना है भारत

एक ओर जहां बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुसलमानों को नागरिकता देने के लिए पूरे देश में लोग उपद्रव किए हुए हैं वहीं अपने ही देश के 10 लाख कश्मीरी पंडितों को रिफ्यूजी की तरह जीवन बिताना पड़ रहा है।

क्योंकि कश्मीरी पंडित किसी दल के लिए चुनाव का मुद्दा नहीं था इसलिए उन्होंने कभी भी इन कश्मीरी पंडितों का दर्द नहीं देखा सर्द रातों में जो दुख इन लोगों ने चेले हैं उसकी कल्पना भी कांग्रेसियों ने नहीं की है यहां तक की उनको वह सारी सुविधाएं भी नहीं मिली जो रिफ्यूजी को मिलती हैं।

और कांग्रेस हो चाहे सपा हो इनको दूसरे देश के मुसलमानों का दर्द दिखाई पड़ रहा है पर देश के पंडितों के लिए उनके मन में ना कोई पीड़ा है ना कोई दर्द है ना ही उनके लिए इन्होंने आज तक किसी भी तरह का कोई बयान बाजी की होगी या काम किया होगा।

आने वाला समय यह बताएगा कि किस तरह वादी से पंडितों को सिर्फ इसलिए भगा दिया गया क्योंकि वह हिंदू हैं और इस्लामी आतंकवादियों ने चुन चुन कर उनकी बहू बेटियों को ना सिर्फ बलात्कार किया बल्कि मार डाला कश्मीरी पंडितों को जो कश्मीर के मूल निवासी हैं उनको वहां से भगा कर जनसंख्या को अपने पक्ष में करने का काम इस्लामी आतंकवादियों ने किया है।

और जब मोदी सरकार उनको उन्हीं के हथियार से मार रही है तो उनकी आंखों में दर्द भरे आंसू टपक रहे हैं और देश की ऐसी राजनीतिक संस्थाएं हैं जिन्होंने पंडितों के आंसू को नहीं देखा उनके आंसू पोछने के लिए लपक कर सामने आ जा रहे हैं क्योंकि वह मुसलमान है।आने वाले चुनाव में जनता इनके खिलाफ जब तक पूरी तरह से अपना मत नहीं दे देगी यह जयचंद इसी तरह से इस्लामी आतंकवाद के पक्ष में खड़े रहेंगे।

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