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अमेरिका ने परमाणु अप्रसार व्यवस्था को क़ायम रखने और ईरान को कभी भी परमाणु हथियार विकसित नहीं करने देना सुनिश्चित करने से संबंधित अपने साझा सुरक्षा हितों का उल्लेख किया

अमेरिका ने परमाणु अप्रसार व्यवस्था को क़ायम रखने और ईरान को कभी भी परमाणु हथियार विकसित नहीं करने देना सुनिश्चित करने से संबंधित अपने साझा सुरक्षा हितों का उल्लेख किया

अमेरिका, फ़्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन के विदेश मंत्रियों ने एक वर्चुअल बैठक में ईरान और अन्य अहम मुद्दों पर चर्चा की। अमेरिकी विदेश मंत्री ब्लिंकन के पद संभालने के बाद हुई इस तरह की इस दूसरी बैठक में उन्होंने सुरक्षा, जलवायु, आर्थिक, स्वास्थ्य और दुनिया के सामने मौजूद अन्य चुनौतियों से निपटने में ट्रांसअटलांटिक साझेदारी की केंद्रीय भूमिका की फिर से पुष्टि की।

ईरान के बारे में, ई3 देशों और अमेरिका ने परमाणु अप्रसार व्यवस्था को क़ायम रखने और ईरान को कभी भी परमाणु हथियार विकसित नहीं करने देना सुनिश्चित करने से संबंधित अपने साझा सुरक्षा हितों का उल्लेख किया। इस संदर्भ में, जेसीपीओए समझौता बहुपक्षीय कूटनीति की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी। ई3 ने फिर से ईरान के साथ कूटनीति, साथ ही ई3 और अमेरिका के बीच विश्वास आधारित गहन संवाद की प्रक्रिया को फिर से शुरू करने के अमेरिका के घोषित इरादे का स्वागत किया। मंत्रियों ने इस प्रमुख सुरक्षा मुद्दे पर परामर्श और समन्वय, चीन और रूस समेत, जारी रखने में अपनी गहरी रुचि की पुष्टि की, तथा इसमें संयुक्त आयोग के समन्वयक के रूप में यूरोपीय संघ के विदेश एवं सुरक्षा मामलों के प्रतिनिधि की भूमिका को स्वीकार किया।

ई3 और अमेरिका ने ईरान द्वारा जेसीपीओए के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं के फिर से पूर्ण अनुपालन किए जाने की अपनी साझा इच्छा की पुष्टि की। विदेश मंत्री ब्लिंकन ने इस बात को दोहराया, जैसा कि राष्ट्रपति बाइडेन ने कहा है, कि अगर ईरान जेसीपीओए के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं का दोबारा सख्ती से अनुपालन शुरू करता है, तो अमेरिका भी ऐसा ही करेगा और वह इस संबंध में ईरान के साथ चर्चा करने के लिए तैयार है।

इस संदर्भ में, ई3 और अमेरिका ने ईरान से कोई अतिरिक्त कदम, ख़ासकर अतिरिक्त प्रोटोकॉल के निलंबन और ईरान में आईएईए की सत्यापन गतिविधियों पर किसी भी तरह की रोक से संबंधित, नहीं उठाने का आह्वान किया है। ई3 और अमेरिका आईएईए की पहुंच को सीमित करने के निर्णय की ख़तरनाक प्रकृति पर ज़ोर देने में एकजुट हैं, और ईरान से इस तरह की गंभीर कार्रवाई के परिणामों पर विचार करने का आग्रह करते हैं, विशेष रूप से कूटनीतिक प्रयास दोबारा शुरू किए जाने के मौजूदा उपलब्ध अवसर के मद्देनज़र। उन्होंने आईएईए और इसके महानिदेशक की पेशेवर और निष्पक्ष भूमिका, तथा जेसीपीओए के तहत ईरान की परमाणु प्रतिबद्धताओं के आवश्यक सत्यापन और निगरानी प्रक्रिया को लागू कराने के उनके प्रयासों को अपने पूर्ण समर्थन की फिर से पुष्टि की।

ई3 और अमेरिका ने 20% तक संवर्धित यूरेनियम और यूरेनियम धातु दोनों के उत्पादन की ईरान की हाल की कार्रवाइयों पर अपनी साझा चिंताओं का उल्लेख किया। इन गतिविधियों का कोई विश्वसनीय असैनिक औचित्य नहीं है। यूरेनियम धातु का उत्पादन परमाणु हथियार के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण क़दम होता है।

ई3 ने अमेरिका और ईरान द्वारा फिर से जेसीपीओए की शर्तों के अनुपालन की संभावना का स्वागत किया। ई3 और अमेरिका ने ऐसा होने पर जेसीपीओए को मज़बूत करने, तथा क्षेत्रीय पक्षों और व्यापक अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर ईरान के मिसाइल कार्यक्रमों और उसकी क्षेत्रीय गतिविधियों से जुड़ी व्यापक सुरक्षा चिंताओं पर विचार करने के अपने दृढ़ संकल्प पर ज़ोर दिया। हम इन लक्ष्यों की दिशा में मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

मंत्रियों ने ईरान से आह्वान किया कि वह मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए हमारे सभी नागरिकों को रिहा करे और उन्हें उनके परिवारों के साथ फिर से एक होने दे। उन्होंने ईरान में मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन जारी रहने पर अपनी गहरी चिंता भी व्यक्त की।

ई3 और अमेरिका इन प्रमुख उद्देश्यों की दिशा में मिलकर काम करने के लिए अपने साझेदारों के साथ सहभागिता के लिए तत्पर है।

उन्होंने खाड़ी क्षेत्र में तनाव को कम करने की दिशा में काम करने का अपना साझा संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से यमन में युद्ध को समाप्त करने की तात्कालिकता पर बल दिया, जबकि अपने क्षेत्रीय साझेदारों की सुरक्षा के लिए अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता की पुष्टि की। यमन पर, मंत्रियों ने युद्ध समाप्त कराने और मानवीय संकट को दूर करने के संयुक्तराष्ट्र के विशेष दूत ग्रिफ़िथ्स के प्रयासों के समर्थन में मिलकर काम करने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने मारिब पर हाल के हूती हमलों और सऊदी अरब में असैनिक ढांचों पर हमलों के बारे में चिंता व्यक्त की, तथा हूतियों और सभी यमनी पक्षों का राजनीतिक प्रक्रिया से रचनात्मक रूप से जुड़ने का आह्वान किया।

इराक़ पर, मंत्रियों ने इरबिल में 15 फरवरी के रॉकेट हमले की अपनी निंदा दोहराई। उन्होंने पीड़ितों, उनके परिवारों और इराक़ी लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की और इस बात पर ज़ोर दिया कि अमेरिका, गठबंधन बलों और नैटो के कार्मिकों और केंद्रों पर हमलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मंत्रियों ने इराक़ी सरकार के लिए अपना समर्थन दोहराया।

आइसिस द्वारा पेश चुनौतियों पर चर्चा करते हुए, मंत्रियों ने इराक़ और सीरिया में आइसिस के ख़तरे को लक्षित करने और ख़त्म करने के लिए महत्वपूर्ण प्रयासों को जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की, जिसमें आइसिस को पराजित करने हेतु 83 सदस्यीय वैश्विक गठबंधन के माध्यम से किए जाने वाले प्रयास भी शामिल हैं। उन्होंने दुनिया भर में आइसिस की शाखाओं और नेटवर्क द्वारा उत्पन्न ख़तरे को लक्षित करने के लिए समन्वित प्रयासों के बढ़ते महत्व पर भी ज़ोर दिया।

मंत्रियों ने चीन द्वारा पेश वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए निकट समन्वय पर सहमति व्यक्त की, साथ ही जलवायु परिवर्तन सहित विभिन्न मुद्दों पर सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।

म्यांमार पर, उन्होंने सैन्य तख़्तापलट की निंदा की। उन्होंने सैन्य नेताओं से आपातकाल की घोषणा को तुरंत रद्द करने, लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को सत्ता वापस सौंपने, हिंसा से बचने, अनुचित रूप से हिरासत में लिए गए सभी लोगों को रिहा करने तथा मानवाधिकारों और क़ानून के शासन का सम्मान करने का आह्वान किया।

मंत्रियों ने नैटो को और मज़बूत बनाने की ज़रूरत और यह सुनिश्चित करने पर सहमति व्यक्त की कि संगठन नैटो रिफ़्लेक्शन ग्रुप की सिफ़ारिशों पर अमल करते हुए मौजूदा दौर की सामरिक वास्तविकताओं का सामना करने के लिए तैयार हो सके।

मंत्रियों ने सहमति व्यक्त की कि कोविड-19 महामारी को समाप्त करने और सामूहिक रूप से बेहतर क्षमताओं के निर्माण के लिए मज़बूत अंतरराष्ट्रीय और बहुपक्षीय सहयोग आवश्यक है। उन्होंने मुख्य रूप से एसीटी-ए/कोवैक्स तंत्र के माध्यम से विश्व स्तर पर टीके की तेज़ उपलब्धता के लिए समर्थन व्यक्त करने समेत महामारी संबंधी वैश्विक प्रयासों की समीक्षा की।

वे नवंबर में ग्लासगो में जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के 26वें संयुक्तराष्ट्र फ़्रेमवर्क कन्वेंशन से पूर्व जलवायु संकट से निपटने की दिशा में तत्परता से काम करने पर सहमत हुए। उन्होंने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि पेरिस समझौते को लागू करने के लिए महत्वपूर्ण सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है, जिसमें तापमान में वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस के भीतर रखने के प्रयास भी शामिल हैं। उन्होंने जलवायु संबंधी बढ़े लक्ष्यों के लिए अहम आगामी लीडर्स क्लाइमेट समिट को लेकर अपनी तत्परता ज़ाहिर की, जिसकी मेज़बानी अमेरिका कर रहा है ।

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