जेलेंस्की कैबिनेट में भ्रष्टाचार,अधिकारीयों का इस्तीफा जारी !

जेलेंस्की कैबिनेट में भ्रष्टाचार,अधिकारीयों का इस्तीफा जारी !



यूक्रैन में एक तरफ जहाँ जंग से परेशान हैं लोग वहीं दूसरे तरफ भ्रस्टाचार भी उन्हें परेशान कर रहा है। तकरीबन एक हफ्ते से राष्ट्रपति भी इस्तीफा पर साइन करवा रहे हैं। यूक्रेन में किए गए बड़े फेरबदल में कुछ वरिष्‍ठ अधिकारियों को बर्खास्‍त कर दिया गया। जेलेंस्की को भ्रष्टाचार से लिप्त देश में सत्ता विरोधी लहर के बीच 2019 में राष्ट्रपति चुना गया था। अब नए आरोप ऐसे समय में आए हैं जब पश्चिमी देश मॉस्को के खिलाफ लड़ाई में यूक्रेन की मदद के लिए अरबों डॉलर लगा रहे हैं। अमेरिका समेत अनेक देशों के अधिकारियों ने यूक्रेन में अंधाधुंध भ्रष्टाचार को देखते हुए सहायता को लेकर और अधिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की है।इसी बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अगले आदेश तक बड़े अधिकारियों के देश छोड़ने पर पाबंदी लगा दी है। जेलेंस्की ने एक भाषण में इसकी जानकारी दी है।

भ्रष्टाचार के इस मामले का असर जेलेंस्की के दफ्तर तक हुआ है। उनके उप प्रमुख किरिलो तिमोशेन्को को भी पद छोड़ना पड़ा है। राष्ट्रपति ने भ्रष्टाचार के आरोपों से निपटने का वादा किया है। इनमें कुछ आरोप सैन्य खर्च से भी जुड़े हैं। इससे यूरोपीय संघ और नाटो में शामिल होने के यूक्रेन के प्रयास मंद पड़ सकते हैं। तिमोशेन्को को पद छोड़ने को कहा गया है। उन्होंने कारण नहीं बताया।स्थानीय मीडिया ने बताया कि उप रक्षा मंत्री वियाचेस्लाव शापोवालोव ने भी यूक्रेन के सशस्त्र बलों के लिए खाद्य सामग्री की खरीद से जुड़े घोटाले में इस्तीफा दे दिया है। उप महा अभियोजक ओलेक्सी सिमोनेन्को ने भी इस्तीफा दे दिया है।

36 वर्षीय वासिल लोज़िन्स्की पर आरोप लगाया गया था कि बढ़ी हुई कीमतों पर जनरेटर की खरीद करने के लिए उन्होंने 400,000 डॉलर की रिश्वत ली थी, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा ग्रिड पर रूसी हमलों के बाद बिजली की कमी से जूझ रहा था। राष्ट्रपति के सहयोगी माईखायलो पोडोलिएक ने कहा कि बर्खास्त लोगों में उन क्षेत्रों के राज्यपाल और मंत्री शामिल हैं, जिन्होंने युद्ध क्षेत्रों में कार्यों को देखा है। पोडोलीक ने ट्वीट किया, 'युद्ध के दौरान सभी को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।'

(प्रियांशु )

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