ईरानियन फिल्म सांग ऑफ़ स्पेरो का सामाजिक सन्दर्भ - भाग -2

ईरानियन फिल्म सांग ऑफ़ स्पेरो का सामाजिक सन्दर्भ - भाग -2

इस फिल्म के पात्रों का विश्लेषण करने पर हमें उनके चरित्र के बारे में पता चलता है और हम इस तरह उस देश , काल के प्रचलित व्यवहार को लोगो तक पंहुचा सकते है | फिल्म की एनालिसिस एक बड़ा पेचीदा काम है क्योंकि उसे ज्यादातर मनोरंजन के रूप में देखा जाता है- पर मै आपके सामने अब लगातार फिल्मो को पढने का तरीका लेकर आऊंगा और फिर उसपर बात होगी |

मुख्य पात्र के चरित्र और चरित्र निर्माण का तरीका -

इस फिल्म का मुख्य पात्र करीम है जो एक शुतुरमुर्ग पालने वाले फार्म में काम करता है | उसकी पुरे विसुअल का निर्माण उसकी पोशाक के माध्यम से किया गया है | पहली बार जब दर्शक करीम से मुखातिब होते है तो उन्हें एक लम्बा, अच्छी कद काठी का पर बेतरतीबी से रहने वाला इंसान दिखायी देता है | खैर ये उसके काम का अंग है और फील्ड में काम करते हुए धूल और पसीना आम बात है | पर पूरी फिल्म में एक -दो बार ही उसे दाढ़ी बनाते और साफ़ सुथरे तरीके से रहते दिखाया गया है |

मुख्य पात्र की खूबी को दर्शाने के लिए अगले सीन का इस्तेमाल किया जाता है और ये हमें दिखाई पड़ता है की वो अपनी गलती न होने के बावजूद भी वो शुतुरमुर्ग को खोजने का प्रयास करता है | पर इसमें सफलता न मिलने पर और नौकरी से निकाल दिये जाने के बावजूद वो किसी भी तरह का प्रतिरोध करता नहीं दिखाई देता है | यहाँ पर जिस मेथड का मै इस्तेमाल कर आपको फिल्म के बारे में बता रहा हू वो पैराडाईगमैटिक और सिनटैगमैटिक मेथड का इस्तेमाल कर रहा हू|

रूप निदर्शनात्मक (paradigmatic) विश्लेषणमें फिल्म में जो भी फ्रेम में दिखता है उस का विश्लेषण है | रूप निदर्शनात्मक विश्लेषण ज्यादातर यथार्थ की बात करता है | वही विन्यास क्रमात्मक विश्लेषण फिल्म की रचना से जुड़ा होता है | फिल्म में जो आख्यान स्वरुप होता है वो मूलतः रूप निदर्शनात्मक विश्लेषण का अंग होता है | इसमें फिल्म की एडिटिंग और शॉट दर शॉट जो अर्थ का निर्माण होता है उसे विश्लेषित किया जाता है | रूप निदर्शनात्मक विश्लेषण से तात्पर्य फ्रेम में दिखाई देने वाले सभी तत्व आते है | चाहे वो किसी कहानी का लोकेशन हो या उसमे इस्तेमाल होने वाले कपडे सब हमे फिल्म के बारे में कुछ बताते है |

विन्यास क्रमात्मक (syntagmatic): विन्यास क्रमात्मक विश्लेषण के द्वारा हर एक शॉट , सीन और सीक्वेंस का न सिर्फ विश्लेषण किया जाता है बल्कि ये भी निश्चित होता है कि उनके बीच कोई सम्बन्ध है कि नहीं | फिल्म निर्माण में शॉट को समझने के लिए दृश्य रचना के हर एक तत्व को पूरी तरह से समझना होता है | किसी भी फिल्म का निर्देशक उस फिल्म के बारे में जिस तरह के विसुअल का निर्माण करता है उसे समझने के लिए उस दृश्य का विन्यास क्रमात्मक विश्लेषण अत्यंत जरूरी है |

आगे पार्ट 3 में

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