साइबर क्राइम पर अंकुश के लिये सर्किल लेबल पर स्पेशल टीम- सलमान ताज पाटिल

साइबर क्राइम पर अंकुश के लिये सर्किल लेबल पर स्पेशल टीम- सलमान ताज पाटिल

कानपुर। दिन पर दिन बढते जा रहे साइबर क्राइम पर रोकथाम करने के लिये कमिश्नरेट पुलिस ने अब कमर कस ली है। हालाकि पिछले एक साल में कमिश्नरेट पुलिस ने कई पचीदे साइबर अपराधों का खुलासा करने में सफलता हासिल की है लेकिन अब जिस तरह से इस डायरेक्शन में प्लानिंग की गई है, उससे कोई भी साइबर अपराधी बच नही पायेगा चाहे वह कितना ही शातिर क्यों न हो। एक खास चर्चा में डीसीपी क्राइम सलमान ताज पाटिल ने साइबर अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिये बनाये गये प्लान को शेयर करते हुये बताया कि साइबर क्राइम पर अंकुश लगाने के लिये सर्किल स्तर पर विशेष टीमों का गठन किया जायेगा, जोकि नौ-नौ घंटे शिफ्ट में 18 घंटे कार्यरत रहेंगी। यह टीम सर्किल के दो-तीन थानों का साइबर क्राइम होगा, उसको डैडिक्टली उसको हैंडिल करेगी।

श्री पाटिल ने कहा कि ''इन एवरी हैंड मोबाइल फोन्स एंड कम्प्यूटर लैब टॉप''। तकरीबन हर व्यक्ति इंटरनेट से कनेक्टेड है। लिहाजा, ट्रेडिशनल क्राइम से ज्यादा साइबर क्राइम बढ़ गया है। बैंक से लेकर पैसे का लेनदेन ंइंटरनेट के जरिये हो रहा है। साइबर क्राइम को लेकर बहुत ज्यादा शिकायतें आ रहीं है। पिछले साल हर थाने में साइबर साथी के रुप में प्रशिक्षित पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। अब साइबर क्राइम से जुड़ी हुई शिकायतों को हल करने और साइबर क्राइम पर अंकुश लगाने के लिये विशेष प्लानिंग की गई है। नई प्लानिंग के तहत हर सर्किल मंे स्पेशल पुलिस स्क्वायड तैनात किया जा रहा है, जोकि 18 घंटे लगातार एक्टिव रहेगा। सर्किल से जुुड़े थानों में आने वाली साइबर क्राइम की शिकायतों को हल करने में यह स्पेशल स्क्वायड वर्क करेगा।

डीसीपी क्राइम ने कहा कि अभी इतनी ज्यादा शिकायतें आ रहीं हैं कि जब तक 'सेटअप' वर्क करता है, तब तक कई शिकायतें और बढ़ जाती हैं। बड़ी दिक्कत यह भी यह साइबर क्राइम करने वाले शातिर अपराधी सिर्फ लोकल या आसपास के जिलों के नहीं बल्कि इंटर स्टेट बिहार, झारखंड और यहां तक ीिक बंगाल के भी होते हैं। कई मामलों में साउथ इंडिया के साइबर क्राइम मिले हैं। ऐसे मे हर केस बड़ा ही पेचीदा हो जाता है। इस दिशा में एक विशेष सेल बनाने का भी प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कुछ पुलिस स्टाफ को इसके लिये विशेष प्रशिक्षण भी दिया जायेगा। किसी खास उपकरण की जरुरत नहीं है क्योकि हाईटेक कंम्प्यूटर आदि पहले से ही खरीदे जा चुके हैं।

श्री पाटिल ने बताया कि साइबर क्राइम के मामले में अलग-अलग तरह की शिकायतें आ रहीं है। फाइनेंशियल फ्रॉड में बैंक के खातों से पैसों का निकल जाना, इंटरनेट के जरिये लेनदेन के मामले में धोखाधड़ी और महिलाओं से जुड़े अपराधों की भी लम्बी फेहरिस्त है। महिलाओं के 'मॉर्फ फुटेज' बनाकर वायरल करके या वायरल करने की धमकी देकर उनके साथ ब्लैकमेलिंग करने उगाही करने के मामले में सामने आयें हैं। उन्हांेने कहा कि महिला संबंधी अपराध बहुत बड़े पैमाने पर है। इसके अलावा इंटरनेट व कम्प्यूटर की जानकारी के रहने के कारण सीनियर सीटीजन साइबर अपराधियों के रैडार पर रहते है। ओल्ड एज़ के एकाउंट में पैसे रहते है इसलिये उन्हें टारगेट किया जा रहा है। गरीब लोंगों को भी साइबर अपराधी नहीं छोड़ रहे हैं। हर तबके के लोग बैंक से रिलेट हैं मगर इस वर्ग को जानकारी न होने के कारण शातिर साइबर अपराधियों के लिये यह लोग इज़ी पाइंट होते हैं।

एक खास सवाल के जवाब में डीसीपी क्राइम कहते हैं कि समस्या यह है कि साइबर सेल में एफआईआर दर्ज करने का प्रावधान नहीं है। एफआईआर भी संबंधित थाने में दर्ज होगी और जांच भी थाना स्तर पर ही होगी। साइबर सेल एक एक्सपर्ट प्लेस होती है, जहां से टैक्निकल सैल्यूशन दिये जाते हैं। थानों को मोटिवेट किया जाता है कि शिकायतकर्ता को न दौड़ायें, शिकायतों को साइबर सेल फॉरवर्ड कर दें।


आलोक अग्रवाल

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