मस्जिद में रामलीला , ये बनारस है गुरु

मस्जिद में रामलीला , ये बनारस है गुरु

ऐसा कुछ सिर्फ और सिर्फ बनारस में ही हो सकता है | पिछले हजारो साल से सनातन धर्म के प्रतिको को सहेजे हुए बनारस अपने में सभी को मिला लेने वाले रंग का प्रयोग सदियों से करता चला आ रहा है | होली हो या दिवाली यहाँ सभी धर्मो के लोग दिख जायेंगे | आज का भारत भले ही रंगों के कारण अलग दिखाई देता हो और सिर्फ रंगों की ही राजनीति कुछ लोग करते है पर बनारस ये जानता है की मूल तत्व रंगहीन होता है | उसमे जो डालो वही रंग दिखाई पड़ेगा |

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राम बनारस के रग -रग में समाहित है | और उसी राम को जब मुश्लिम समाज के लोग पूरी श्रद्धा के साथ पूजते है तो वो असली भारत और खासकर काशी का प्रतीक बन कर उभर रहा है | लाट भैरव की मस्जिद का नाम ही अपने में भैरो को समाहित किये हुए है और ऐसे प्रतीकों से ही आधुनिक भारत का निर्माण होगा | हमें जरूरत है अपने साझा सोच को आगे बढ़ाने की |

वैसे तो बनारस में रामनगर की रामलीला विश्व प्रशिद्ध है पर राम इस शिव के इस शहर के रग -रग में बसते है | शिव के अराध्य नारायण के रूप का यहाँ हर लोग पूजा और आराधना करता दिखाई पड़ जायेगा - अब अगर सभी को ये बात समझ में आ जाये तो राम सब के अराध्य होंगे और राम नाम पर कोई विवाद नहीं होगा |

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