तीन कृषि कानूनों पर केजरीवाल का_ बयान - कानून को सत्यापित करने के लिए खुली बहस करवाए सरकार

तीन कृषि कानूनों पर केजरीवाल का_ बयान - कानून को सत्यापित करने के लिए खुली बहस करवाए सरकार

तीन कृषि कानूनों पर केजरीवाल का_ बयान - कानून को सत्यापित करने के लिए खुली बहस करवाए सरकार।

देश की राजधानी दिल्ली में करीब एक महीना प्रदर्शन के पूरा होने को आया है। आपको बता दें कि दिल्ली की सड़कों पर हरियाणा उत्तर प्रदेश और पंजाब सहित कई अन्य राज्यों के किसान प्रदर्शन कर रहे हैं। इस प्रदर्शन की वजह केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए नए तीन कृषि कानून है।

किसानों का कहना है कि यह कानून सिर्फ बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाया और इससे किसानों की न्यूनतम राशि और घटकर कम हो जाएगी। सरकार से कई दौर की बातचीत के बावजूद कोई निर्णय नहीं निकल पाया है।

आपको बता दें कि सरकार में इस कानून से किसानों को लाभ होगा इस बात की लिखित गारंटी भी देने को कहा है। परंतु किसानों ने इस कानून में किसी प्रकार के संशोधन नहीं बल्कि कानून को विशेष संसद सत्र द्वारा रद्द करने की बात कही है।

जहां एक तरफ दिल्ली की सड़कों पर किसान प्रदर्शन कर रहे हैं वही राजनीति का पारा भी ऊपर चढ़ता जा रहा है। सभी विपक्षी मिलकर केंद्र सरकार पर आरोपों की बौछार कर रहे हैं जिससे किसानों को विपक्ष का जबरदस्त समर्थन प्राप्त हो रहा है।

आपको बता दें किसानों के समर्थन में उपवास का दावा करने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अब एक नया दांव खेला है उन्होंने केंद्र से कहा है कि केंद्र का कोई भी मंत्री हमारे किसान नेताओं के साथ आकर बहस कर ले। जिससे कानून की सच्चाई देश के सामने आ जाएगी।

आपको बता दें कि अरविंद केजरीवाल रविवार को सिंधु बॉर्डर स्थित गुरु तेज बहादुर स्मारक परिषद में पंजाबी एकेडमी की ओर से गुरु गोविंद सिंह के चारों बेटों और माता गुजरी जी की शहादत पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे।उन्होंने कहा कि किसानों की लड़ाई अब आर या पार की हो चुकी है क्योंकि किसान दिल्ली की कड़ाके की ठंड में रहने के लिए मजबूर हो गया है।

सिंधु बॉर्डर पर गुरु नानक देव जी के बेटों की शहादत के लिए आयोजित कार्यक्रम में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल केंद्र सरकार पर जमकर बरसे उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का कोई एक भी ऐसा नेता जो इस कानून के लाभ बता सके। यह कानून किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए नहीं बल्कि उनकी जमीनों को छीनकर पूंजी पतियों को देने के लिए बनाया गया है। उन्होंने कहा कि किसानों की अब यह लड़ाई आर या पार की हो चुकी है क्योंकि किसान आज लगातार 32 दिनों से दिल्ली की कड़ाके की ठंड में बैठने को मजबूर हो चुका है।

उन्होंने आगे कहा कि इसीलिए मैं केंद्र सरकार से अपील करता हूं कि वह इस काले कानून को वापस ले ले। उन्होंने कहा कि अन्ना आंदोलन में हम लोग बैठा करते थे तो हमें भी बदनाम किया जाता था। आज किसानों को आतंकवादी कहा जा रहा है।

नेहा शाह

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