अखिल भारतीय कायस्थ महासभा, वाराणसी, के नदेसर स्थित स्वामी विवेकानंद जी की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित कर उनका जन्मदिन मनाया

अखिल भारतीय कायस्थ महासभा, वाराणसी, के नदेसर स्थित स्वामी विवेकानंद जी की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित कर उनका जन्मदिन मनाया गया सर्वप्रथम् महासभा के समस्त सदस्य में उनकी प्रतिमा पर मोमबत्ती जलाकर नमन् करते हुए माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए तत्पश्चात कार्यक्रम में उपस्थित विशिष्ठ जनों नें उनके जीवन पर प्रकाश डाला।

वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डा० मुकेश श्रीवास्तव नें बयाया कि वे रामकृष्ण परमहंस के सुयोग्य शिष्य थे। उन्हें 2 मिनट का समय दिया गया था लेकिन उन्हें प्रमुख रूप से उनके भाषण की शुरुआत "मेरे अमेरिकी बहनों एवं भाइयों" के साथ करने के लिये जाना जाता है उनके संबोधन के इस प्रथम वाक्य ने सबका दिल जीत लिया था। प्रांतीय अध्यश्र अनिल श्रीवास्तव नें कहा कि। वे वेदांत केविख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु थे।

उनका वास्तविक नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था। उन्होंने अमेरिका स्थित शिकागो में सन् 1893 में आयोजित विश्व धर्म महा सभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था।

भारत का आध्यात्मिकता से परिपूर्ण वेदांत दर्शन अमेरिका और यूरोप के हर एक देश में स्वामी विवेकानन्द की वक्तृता के कारण ही पहुँचा कार्यक्रम को प्रमुख रुप से खेलकूद, शिक्षा ऐवं सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के प्रांतीय अध्यक्ष मनोज श्रीवास्तव प्रांतीय संगठन मंत्री शैलेंन्द्र श्रीवास्तव, राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री मुकेश सहारा, मंडल प्रभारी नवीन श्रीवास्तव, महानगर अध्यक्ष मनोज श्रीवास्तव, शशांक श्रीवास्तव, युवा जिलाध्यक्ष अमन श्रीवास्तव, रजनीकांत श्रीवास्तव, पंकज श्रीवास्तव, राकेश श्रीवास्तव, अजय श्रीवास्तव, कोषाध्यक्ष मधुसूदन श्रीवास्तव, निंदिया श्रीवास्तव, काजल श्रीवास्तव एवं दीप्ति श्रीवास्तव,अजय श्रीवास्तव, अनिल पाण्डेय सहित कई गणमान्य लोगो नें संबोधित किया।

एवं अनाथ बच्चों को बिस्कुट एवं खाद् पदार्थ वितरित किया गया । संचालन जिला महामंत्री आशीष श्रीवास्तव एवं धन्यवाल ज्ञापन कार्यवाहक जिलाध्यक्ष पंकज श्रीवास्तव नें किया।

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