बंगाल चुनाव : राष्ट्रवाद को चुनौती देता क्षेत्रीय गठबंधन

बंगाल चुनाव : राष्ट्रवाद को चुनौती देता क्षेत्रीय गठबंधन


भारत ही नहीं पुरे विश्व की निगाह बंगाल चुनाव की ओर लगी हुई थी | अटकलों का दौर चल रहा था, जिसमे मीडिया, राजनैतिक दल , चुनाव विश्लेषक सभी अपनी –अपनी बाते रख रहे थे | तृणमूल कांग्रेस की नैया डूबती लग रही थी | भारी संख्या में लोग उनको छोड़ कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम रहे थे | चुनाव में प्रचार का दौर जैसे ही शुरू हुआ हिंसा की बाढ़ आ गयी | लगा की चुनाव सिर्फ बंगाल में हो रहा है |

पुरे देश में चुनाव के दौरान शांति थी पर बंगाल सुलग रहा था | लगातार विरोधियो को चुप करने की कोशिश अपने चरम पर पहुच गयी | यहाँ तक की राष्ट्रीय नेताओ तक को नही बख्शा गया | भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा हो या कोई और नेता सभी के उपर प्रहार हुआ | राष्ट्र में शोर मच रहा था पर तृणमूल कांग्रेस का विपक्ष के उपर वॉर नहीं रुका |

जैसे ही विधानसभा का नतीजा आया सबसे पहले एक पैंतीस साल का युवा भाजपा कार्यकर्त्ता अभिजित सरकार, जो उत्तर कोलकाता में रहने वाला एक मूर्तिकार था, इस हिंसा का शिकार हो गया | सडको पर लूट और हिंसा का दृश्य मानो सीरिया और लेबनान का दृश्य दर्शा रहा था | कानून व्यवस्था सँभालने वाले अपना हाथ मोड बैठे रहे और दंगाई खासकर एक समुदाय के लोगो की संपत्ति को निशाना बनाते रहे |


साभार : सोशल मीडिया

अपनी आँखों के सामने जलते आशियाने और और लुटती दुकानों को देखकर एक बार तो लोगो को विश्वास नहीं हो रहा था कि वो भारत के ही एक राज्य पश्चिम बंगाल में रहते है और कोलकाता एक मेट्रो सिटी है | भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्त्ता और उनके घरो पर लगे पोस्टर , बैनर और झंडे की होली जलाते तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्त्ता दिख रहे थे | बहुसंख्यक हिन्दू अपने आप को लाचार मान और शासन को अपने ही खिलाफ देख पलायन के लिए मजबूर हो गया |

बंगाल में हिंसा अभी भी थमने का नाम नहीं ले रहा है , यहाँ तक की राज्यपाल को खुद निकल कर हिंसा ग्रस्त इलाको का दौरा करना पड़ा पर राज्य सरकार के चेहरे पर कोई शिकन नही है क्योंकि उसको पता है कि उसका मतदाता कही जाने वाला नहीं | ये हिंसा बंगाल के ग्रामीण इलाको और खासकर मुश्लिम बहुल इलाको में ज्यादा है जहाँ तृणमूल कार्यकर्त्ता भाजपा के लोगो का घर, दुकान, लूट ले रहे है | महिला और बेटियों को सरेआम बेज्जत किया जा रहा है | सारा बंगाल अभी मध्ययुगीन भारत की तरह जल रहा है |

ये दृश्य कश्मीर की घाटी में १९९० के दौरान हुई हिंसा और कश्मीरी पंडितो का कत्लेआम और अपने ही देश में भागने और शरणार्थी के रूप में रहने को मजबूर होने की तरह था | पर आश्चर्य इस बात का कि आज भी भारत में एक वर्ग है जो अपना सिक्का जमाये रखने के लिए देशहित को ताक पर रखने में जरा भी नहीं हिचकिचाता |

तृणमूल की राजनीति का आधार बंगाल मूल निवासी , बांग्ला भाषी और मुस्लिम वोटर है | वो जानते है कि सिर्फ हिन्दुओं के वोट पर उनको सरकार बनाने का मौका नहीं मिलेगा इसलिए उन्होंने जम कर मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति अपनाई | बंगाल में मुस्लिम वोटो का प्रतिशत अगर देखे तो नब्बे फीसदी से ज्यादा वो ममता बनर्जी को गए और उन्होंने अपना वोट बटने नही दिया |वोट न बटने के पीछे कई कारण थे जिसमे मुख्य बिहार चुनाव था जिसमे ओवैसी की पार्टी ने न सिर्फ कुछ सीटे जीती बल्कि कई जगह तेजस्वी यादव के हार के कारण बने | बिहार के चुनाव से सीख लेते हुए मुस्लिम मतदाताओं ने अपने मन में ओवैसी को रखते हुए ममता को वोट दिया क्योंकि उनको पता था की ओवैसी जीतेंगे नही और उनका वोट बटा तो भाजपा सत्ता में आ जायेगी |

एक राष्ट्रीय पार्टी से बंगाल में मुस्लिम मतदातो की इतनी बेरुखी का कारण अगर आप समझने का प्रयास करे तो आपको एक बात स्पष्ट दिखाई देगी की पुरे देश में मुसलमान उसी पार्टी को वोट करता है जो बीजेपी को हराने की ताकत रखती है | चाहे तो यूपी में अखिलेश या मायावती हो , या बिहार में तेजस्वी , राजस्थान, मध्य प्रदेश में कांग्रेस, असम में कांग्रेस या अन्य| ये मतदान का तरीका कही कही जब व्यक्तिगत कारणों से बदलता है तो मीडिया उसको मुसलमानों के बीच मोदी की लोकप्रियता बताती है जो एकदम सही नहीं है |

आप अगर गुप्त सर्वे कर उनके व्यवहार का अध्ययन करे तो ज्यादातर मुस्लिम मतदाता या तो मज़बूरी में या फिर किसी दबाव में भाजपा को वोट देता है | स्वतंत्र रूप से वो कभी भी इनका मतदाता नहीं होता |

मद्रास हाईकोर्ट में एक केस मुस्लिम लोगो ने दाखिल किया की अब एक इलाके में उनका बहुमत है इसलिए हिन्दू पूजा को वो सडको पर से नहीं निकलने देंगे | ये तमिलनाडू के वी कालाथुर गाव, पेराम्बलुर जिला , का किस्सा है | मुस्लिमो ने कहा की अब उनका बहुमत है इसलिए हिन्दू पूजा पाठ बंद करे ये उनके धर्म के अनुसार ठीक नहीं है | अब एक जगह जब मुस्लिम बहुमत में आ गये तो उनकी सोच यहाँ तक आ गयी की हिन्दू पूजा पाठ बंद करा दो | वही दूसरी और हिन्दू पुरे देश में बहुमत में है पर उन्होंने मुस्लिमो या अन्यं धर्म के लोगो को उनकी पूजा और धर्मस्थल बनाने की पूरी स्वतंत्रता दे रखी है |


साभार : सोशल मीडिया

आप सोचिये की अगर किसी हिन्दू संस्था ने इस तरह की चुनौती कोर्ट में दी होती तो देश भर के सेक्युलर, रुदाली विलाप कर रहे होते और विश्व में मीडिया की हलचल बढ़ गयी होती | पर कोर्ट ने कुछ पाबंदियो के साथ हिन्दुओ को अनुमती दे दी और कहाँ की सड़क सेक्युलर होती है उसपर किसी भी तरह की धार्मिक जलूस को रोका नहीं जा सकता |

बंगाल हिंसा के बारे में बताने के लिए देश के हालत जानना जरुरी है क्योंकि बंगाल हिंसा की नीव सिर्फ वहां पर नहीं है ये एक तरह की मानसिकता है जिसको तोड़ने की जरुरत है | अपने आप को प्रोग्रेसिव कहने वाला मुसलमानों का एक बड़ा समहू या तो इन घटनाओ पर चुप्पी मारे रहता है या फिर दिखावे का विरोध कर अपने बिल में घुस जाता है |

बंगाल हिंसा का ये आलम है कि मीडिया भी गाँव में जाने से डर रही है | बंगाल से बीजेपी के जीते हुए विधायको को तो केन्द्रीय सुरक्षा प्रदान कर दिया गया पर दो करोण हिन्दू और हिंदी, बांग्ला बोलने वाले वोटर जिन्होंने भाजपा को मत दिया है अपनी जान बचाने के लिए या तो तृणमूल का दामन थाम रहे है या फिर असम की ओर भाग रहे है |

अगर समय रहते इस नरसंहार पर काबू न पाया गया तो एक वर्ग की मंसा कामयाब होगी और भारत में साप्रदायिक आधार पर विभाजन तीखा और हिंसक होता चला जाएगा जिसकी लपटों में पूरा भारत होगा |


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