"प्रेस को एक शक्तिशाली आवाज और हमारे लोकतंत्र का एक योग्य चौथा स्तंभ बनाने वाले दिग्गजों को विनम्र श्रद्धांजलि

प्रेस को एक शक्तिशाली आवाज और हमारे लोकतंत्र का एक योग्य चौथा स्तंभ बनाने वाले दिग्गजों को विनम्र श्रद्धांजलि

राष्ट्रीय प्रेस दिवस- 16 नवम्‍बर- भारत में एक स्वतंत्र और जिम्मेदार प्रेस का प्रतीक है। यह वह दिन था जिस दिन भारतीय प्रेस परिषद ने यह सुनिश्चित करने के लिए एक नैतिक प्रहरी के रूप में कार्य करना शुरू किया था कि न केवल शक्तिशाली माध्यम प्रेस अपेक्षित उच्च मानकों को बनाए रखे बल्कि यह किसी बाहरी कारकों के प्रभाव या खतरों से नहीं रुके। हालांकि दुनिया भर में कई प्रेस या मीडिया परिषदें हैं, भारतीय प्रेस परिषद एक अद्वितीय संगठन है क्योंकि यह एकमात्र संगठन है जो प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करने के अपने कर्तव्य में देश के साधनों पर भी अधिकार का प्रयोग कर सकता है।

उद्घाटन भाषण देते हुए, केन्‍द्रीय सूचना एवं प्रसारण, युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री, श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने आज के विचार-विमर्श के विषय "राष्ट्र निर्माण में मीडिया की भूमिका" पर श्री स्वपन दासगुप्ता को उनके विद्वतापूर्ण विचारों को अर्थपूर्ण ढंग से व्‍यक्‍त करने के लिए बधाई दी।" "प्रेस को एक शक्तिशाली आवाज और हमारे लोकतंत्र का एक योग्य चौथा स्तंभ बनाने वाले दिग्गजों को विनम्र श्रद्धांजलि देने का यह एक महत्‍वपूर्ण अवसर है।" उन्होंने कहा, "प्रेस के साथ स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाले हमारे बड़े नेताओं की घनिष्ठ भागीदारी ने उन्हें संवैधानिक प्रावधानों के माध्यम से प्रेस की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया"। भारतीय प्रेस परिषद का जन्म बहुत बाद में हुआ, लेकिन प्रयोजन वही था: लोकतंत्र की रक्षा और मजबूती सुनिश्चित करना।"

केन्‍द्रीय मंत्री ने आगे कहा कि "अफसोस की बात है कि प्रेस की स्वतंत्रता के लिए लाइट हाउस के रूप में भारतीय प्रेस परिषद के अस्तित्व में आने के एक दशक के भीतर, मौलिक अधिकारों के निलंबन के साथ-साथ इसे आपातकाल के दौरान समाप्त कर दिया गया था। यह मेरे लिए गर्व की बात है कि परिषद को संसद के एक ताजा कानून के जरिये नए सिरे से पुनर्जीवित किया गया और यह कार्य किसी और ने नहीं बल्कि सूचना और प्रसारण मंत्री के रूप में श्री लालकृष्ण आडवाणी जी ने किया। एक राष्ट्र के रूप में हमने तब से पीछे मुड़कर नहीं देखा है, हालांकि आईटी कानून के 66ए द्वारा लगाए गए अस्वीकार्य प्रतिबंधों के माध्यम से व्यवधान हुआ है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इसे उचित रूप से खारिज कर दिया गया था। पिछले 75 वर्षों में, हमारे महान देश में लोकतंत्र फला-फूला है, वैसे ही मीडिया भी फला-फूला है।"

केन्‍द्रीय मंत्री ने कहा कि "मेट्रो शहरों में पत्रकारों को दरभंगा, पुरी, सहारनपुर, बिलासपुर, जालंधर, कोच्चि आदि में अपने समकक्षों का सम्मान करना चाहिए- आपके दोस्तों को सम्मानित किया जाना चाहिए और उन्हें श्रेय दिया जाना चाहिए। स्‍टोरी मायने रखती है स्थान या स्टेशन के कोई मायने नहीं हैं! स्ट्रिंगरों को अच्छी तरह से भुगतान करना चाहिए, उन्हें पुरस्कृत करना और उनके आत्मविश्वास में सुधार करना एक जीवंत मीडिया परिदृश्य के लिए महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, दुनिया के साथ गति बनाकर रखते हुए, प्रेस परिषद को ट्रांसजेंडर प्रतिनिधित्व के साथ-साथ समाचारों में महिलाओं की सुरक्षा और विविध विचारों को बढ़ावा देने पर जोर देने की आवश्यकता है।"

श्री ठाकुर ने प्रसन्नता व्यक्त की कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने सरल और पारदर्शी प्रक्रियाओं के माध्यम से शासन के मानदंडों को सुव्यवस्थित करके सूचना परिदृश्य को और अधिक मजबूत बनाया है और नए भारत के निर्माण में मीडिया को एक बड़ी और अधिक रचनात्मक भूमिका निभाते हुए देखना चाहते हैं क्‍योंकि दुनिया में हमारे देश का कद बढ़ा है। केन्‍द्रीय मंत्री ने कहा कि "सभी चीजें जिनका गति के साथ विस्तार होता है, भारत में मीडिया का विस्तार एक सतर्क नोट के योग्य है। मीडिया प्रशासन की अधिकांश संरचना स्व-नियामक है। लेकिन स्व-नियामक का मतलब गलती करने का लाइसेंस मिलना और जान-बूझकर गलती करना नहीं है।" इससे मीडिया की विश्‍वसनीयता खत्‍म होगी। पक्षपात और पूर्वाग्रह को अस्‍वीकार किया जाना चाहिए। यह मीडिया का काम है कि वह इस बारे में चिंतन करे और आत्मनिरीक्षण करे कि इंफोडेमिक के वायरस से खुद को कैसे बचाया जाए, जो भौगोलिक क्षेत्रों में समाज के बारे में दुर्भावनापूर्ण गलत सूचना फैलाता रहता है। ऐसी ही एक दूसरी चिंता पेड न्यूज और फर्जी खबरें है। इसी तरह सोशल मीडिया द्वारा फैशनेबल बनाई गई क्‍लिकबेट पत्रकारिता मीडिया की विश्वसनीयता में कोई योगदान नहीं देती; यह राष्ट्र-निर्माण में और भी कम योगदान देती है। मीडिया को इस बात की इजाजत नहीं देनी चाहिए कि जिम्मेदार, निष्पक्ष और संतुलित पत्रकारिता पर कोई और कब्‍जा करे।"

मंत्री महोदय ने आगे कहा, "हमारी सरकार इन और अन्य चुनौतियों से निपटने के लिए मीडिया को सक्षम बनाने में विश्वास करती है। हाल ही में संशोधित आईटी नियम, टेलीविजन फीड के अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग के लिए संशोधित नियम, और प्रस्तावित सरलीकृत प्रेस पंजीकरण प्रक्रिया इस दिशा में की गई कुछ पहलें हैं। हमने आधिकारिक सूचना के प्रवाह में किसी भी कमी को दूर करने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास किया। सभी जानकारी और डेटा अब पीआईबी वेबसाइट पर वास्तविक समय के आधार पर कई भाषाओं में उपलब्ध हैं। हम पीआईबी की तथ्य-जांच सेवा के साथ फर्जी खबरों को खत्म करने में अपनी भूमिका निभा रहे हैं ताकि दुर्भावनापूर्ण दुष्प्रचार के प्रचार और प्रसार दोनों को रोका जा सके। प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी जी के विजन को ध्यान में रखते हुए, हमने छोटे और मध्यम समाचार पत्रों व पत्रिकाओं के साथ-साथ संस्कृत और भारतीय भाषाओं जैसे बोडो, डोगरी, खासी, कोंकणी, मैथिली, मणिपुरी, मिजो, आदि में छपने वाले समाचार पत्रों को हर संभव सहायता प्रदान की है। उपेक्षा और भेदभाव की किसी भी भावना को दूर करने के लिए, हम जम्मू और कश्मीर तथा पूर्वोत्तर में मीडिया तक पहुंचे हैं।"

सूचना और प्रसारण, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री, डॉ. एल मुरुगन ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, "16 नवम्‍बर एक प्रतीकात्मक दिन है जब भारतीय प्रेस परिषद ने स्वतंत्रता और जिम्मेदारी के साथ बिना किसी डर या पक्षपात के पत्रकारिता के उच्चतम मानकों को सुनिश्चित करने के लिए काम करना शुरू किया। आपातकाल प्रेस के लिए काला दिन था और हम यह नहीं भूल सकते कि सरकार के खिलाफ लिखने वालों को सालों तक जेल में रखा गया। मीडिया को बेजुबानों की आवाज बताते हुए डॉ. मुरुगन ने कहा, "प्रेस लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और यह सिर्फ खबर नहीं बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि सरकार की नीतियां और योजनाएं लक्षित लाभार्थियों तक पहुंचे।'' उन्‍होंने कहा, "हमने अमृत काल में प्रवेश किया है और एक प्रगतिशील और समृद्ध राष्‍ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और सरकार भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के उद्देश्य से सभी के साथ मिलकर काम कर रही है।

श्री स्वपन दासगुप्ता ने कहा, "इंटरनेट और सोशल मीडिया ने पूरे मीडिया परिदृश्य को बदल दिया है। मुख्यधारा के मीडिया, जैसे अखबार और टेलीविजन, ने पूरी दुनिया में महत्वपूर्ण गिरावट देखी है। वैश्विक स्तर पर, इसमें 11 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। मुख्यधारा के मीडिया का अब समाचार देने का एकाधिकार नहीं है। श्री दासगुप्ता ने आगे कहा, "पूर्णतया एक समूह तक सीमित पत्रकारिता बढ़ रही है और लोग मुख्यधारा के मीडिया पर हावी रहने राजनीतिक समाचारों के अलावा स्वास्थ्य, विज्ञान, चिकित्सा, खेल जैसे समाचारों की तलाश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल मीडिया ने राष्‍ट्रीय सीमाओं को मिटा दिया है" जैसाकि वाणिज्यिक और आर्थिक पदचिह्न सहित भारत के रणनीतिक पदचिह्न दुनिया भर में बढ़ रहे हैं, जब तक हम भारत में निर्मित, भारत में आधारित मीडिया को आगे नहीं बढ़ाएंगे, भारतीय मूल्यों को आगे ले जाना, जो इसे आगे ले जा सकता है, उस दृष्टिकोण की हमारी संपूर्ण गुणवत्ता में हम कहीं न कहीं पीछे रह जाएंगे"।

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