विश्व प्रसिद्ध महाप्रभु जगन्नाथ रथयात्रा आज से आरम्भ ......
आज पुरी में विश्व प्रसिद्ध महाप्रभु जगन्नाथ यात्रा आरंभ हो चुकी है और इसके लिए लाखों लोग इकट्ठे हुए हैं। यहां पुलिस की पूरी व्यवस्था की गई है। सुबह से...

आज पुरी में विश्व प्रसिद्ध महाप्रभु जगन्नाथ यात्रा आरंभ हो चुकी है और इसके लिए लाखों लोग इकट्ठे हुए हैं। यहां पुलिस की पूरी व्यवस्था की गई है। सुबह से...
आज पुरी में विश्व प्रसिद्ध महाप्रभु जगन्नाथ यात्रा आरंभ हो चुकी है और इसके लिए लाखों लोग इकट्ठे हुए हैं। यहां पुलिस की पूरी व्यवस्था की गई है। सुबह से महाप्रभु के सभी अनुष्ठान सही समय पर हो रहे हैं|
हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भगवान जगन्नाथजी की पुरी में रथ यात्रा निकाली जाती है। रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ के अलावा उनके बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा का रथ भी निकाला जाता है। इस रथ यात्रा को लेकर मान्यता है कि एक दिन भगवान जगन्नाथ की बहन सुभद्रा ने उनसे द्वारका के दर्शन कराने की प्रार्थना की थी। तब भगवान जगन्नाथ ने अपनी बहन की इच्छा पूर्ति के लिए उन्हें रथ में बिठाकर पूरे नगर का भ्रमण करवाया था और इसके बाद से इस रथयात्रा की शुरुआत हुई थी।
इसलिए हिंदू धर्म में इसका विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी व्यक्ति इस रथयात्रा में शामिल होकर इस रथ को खींचता है उसे सौ यज्ञ करने के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।
800 साल पुराने इस मंदिर में भगवान कृष्ण को जगत के नाथ जगन्नाथजी के रूप में पूजा जाता है और इनके साथ उनके बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा भी विराजमान हैं। रथयात्रा में तीनों ही देवों के रथ निकलते हैं। रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ के साथ भाई बलराम और बहन सुभद्रा के लिए अलग-अलग रथ होते हैं और इन रथों को बनाने की शुरुआत अक्षय तृतीया से होती है। रथयात्रा में सबसे आगे बलराम और बीच में बहन सुभद्रा का रथ रहता है। सबसे पीछे भगवान जगन्नाथ का रथ होता है। सभी के रथ अलग-अलग रंग और ऊंचाई के होते हैं।
भगवान बलरामजी के रथ को 'तालध्वज' कहा जाता है और इसकी पहचान लाल और हरे रंग से होती है। वहीं सुभद्रा के रथ का नाम 'दर्पदलन' अथवा 'पद्म रथ' है,उनके रथ का रंग काला या नीले रंग को होता है, जिसमें लाल रंग भी होता है। भगवान जगन्नाथ के रथ को नंदीघोष अथवा गरुड़ध्वज कहा जाता है, इनका रथ लाल और पीले रंग का होता है।
रथ हमेशा नीम की लकड़ी से बनाया जाता है, क्योंकि ये औषधीय लकड़ी होने के साथ पवित्र भी मानी जाती है। हर साल बनने वाले ये रथ एक समान ऊंचाई के ही बनाए जाते हैं। इसमें भगवान जगन्नाथ का रथ 45.6 फीट ऊंचा, बलराम का रथ 45 फीट और देवी सुभद्रा का रथ 44.6 फीट ऊंचा होता है।
#WATCH | The Jagannath Rath Yatra begins in Puri, Odisha with much fanfare. The participation of devotees in the Rath Yatra has been allowed this time after a gap of two years following the COVID pandemic. pic.twitter.com/oODjwSLma0
— ANI (@ANI) July 1, 2022





