केंद सरकार ने लाभार्थियों को एक वर्ष के लिए मुफ्त खाद्यान्न देने का किया फैसला किया
शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कवर किए गए एक वर्ष के लिए मुफ्त खाद्यान्न देने का फैसला किया हैं। जिसमे 81...

शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कवर किए गए एक वर्ष के लिए मुफ्त खाद्यान्न देने का फैसला किया हैं। जिसमे 81...
शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कवर किए गए एक वर्ष के लिए मुफ्त खाद्यान्न देने का फैसला किया हैं। जिसमे 81 करोड़ लाभार्थी सम्मलित रहेंगे। जो परिवार इसके इच्छुक है उन्हे मोटे अनाज के लिए एक रुपया,गेहूं के लिए ,और चावल के लिए तीन रुपया प्रति किलो का भुगतान करते थे। उन्हें 2023 तक के लिए 35 किलो खाद्यान्न मुफ्त मिलेगा और अन्य को साल के अन्त महीने तक महीने में पांच किलो राशन मुफ्त मिलेगा। सरकार इस योजना के लिए 2 लाख करोड़ रुपए की और अधिक राशि का अनुमान लगाया हैं।
इस फैसले की जानकारी कैबिनेट बैठक के बाद केंदीय खाद्य मंत्री पियूष गोयल ने दी। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गरीब सहयोगियों के लिए एक और प्रतिबिंब हैं। उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्य योजना के तहत 28 महीने तक 5 किलो राशन मुफ्त में देने का सुनिश्चित किया।
यह सरकार का एक और उल्लेखनीय निर्णय है। प्रधानमंत्री ने एनएफएसए के तहत कवर किए गए 81.35 करोड़ लोगों को मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराने का फैसला किया है। खाद्य मंत्री ने बताया कि महामारी के बाद आर्थिक स्थिति सामान्य थी। लेकिन अंत्योदय अन्न योजना,पीएमजीकेएवाई और एनएफएसए का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का निर्णय लिया गया। जोकि अप्रैल 2020 में लॉकडाउन के दौरान शुरू की गई PMGKAY इस साल के अन्त में समाप्त होने वाली थी।
सरकार ने बताया कि इस योजना को पूरा करने के लिए देश में आनाज की मात्रा पर्याप्त रूप से भण्डार में हैं। विपक्ष ने केंद सरकार से आर्थिक स्थिति, महंगाई और बेरोजगारी को देखते हुए जरूरतमंद लोगों के लिए खाद्यान्न उपलब्ध कराने का आग्रह करता रहा है। भाजपा ने बीते विधानसभा चुनावो में राजनीतिक प्रचार के एक बिंदु के रूप में इस्तेमाल किया था।
(राघवेन्द्र )





