हेट क्राइम पर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार के मंशे पर उठाया सवाल, कहा, "नफरती भाषण पर किसी भी तरह से कोई समझौता नहीं किया जा सकता ''
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि "भारत जैसे एक पंथनिरपेक्ष देश में धर्म के आधार पर नफरत की भावना से किए जाने वाले अपराधों के लिए कोई गुंजाइश नहीं...

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि "भारत जैसे एक पंथनिरपेक्ष देश में धर्म के आधार पर नफरत की भावना से किए जाने वाले अपराधों के लिए कोई गुंजाइश नहीं...
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि "भारत जैसे एक पंथनिरपेक्ष देश में धर्म के आधार पर नफरत की भावना से किए जाने वाले अपराधों के लिए कोई गुंजाइश नहीं है." सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "नफरती भाषण पर किसी भी तरह से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।" कोर्ट ने कहा कि अगर सरकार नफरती भाषण की समस्या को समझेगी, तभी समाधान निकलेगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह के किसी अपराध से अपने नागरिकों की हिफाजत करना सरकार का कर्तव्य है। जस्टिस के एम जोसेफ और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने कहा, "जब नफरत की भावना से किए जाने वाले अपराधों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी, तब एक ऐसा माहौल बनेगा, जो खतरनाक होगा। नफरती भाषण पर किसी भी तरह से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।"
साल 2021 में नोएडा में 62 साल के काजीम अहमद शेरवानी हेट क्राइम का शिकार हो गए थे। इसी मामले में सुनवाई करते हुए जस्टिस केएम जोसेफ की अध्यक्षता वाली बेंच ने टिप्पणी की है।सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में यो सरकार को दो हफ्तों का समय दिया है और हलफनामा दाखिल करने को कहा है। अगर कोई व्यक्ति पुलिस के पास आता है और कहता है कि मैंने टोपी पहन रखी थी और मेरी दाढ़ी खींची गई और धर्म के नाम पर गाली दी गई। इसके बाद भी कोई केस दर्ज नहीं किया गया तो यह एक समस्या है। ऐसे पुलिस वालों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। कोर्ट ने आगे कहा कि जो कोई पुलिस स्टेशन आ रहा है, उसे आरोपी जैसा महसूस नहीं कराया जाना चाहिए।
अदालत ने उनसे कहा- क्या आप ये स्वीकार नहीं करेंगी कि हेट क्राइम हुआ है और आप इस मामले को दबा देंगे? हम सिर्फ़ अपनी पीड़ा व्यक्त कर रहे है। अल्पसंख्यक हो या बहुसंख्यक, कुछ अधिकार हर लोगों के पास होते हैं. हम एक परिवार में पैदा होते हैं और पलते हैं, लेकिन हम एक राष्ट्र के रूप में खड़े होते है। आपको इसे गंभीरता से लेना होगा। याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट हुज़ेफ़ा अहमदी ने कहा कि राज्य सरकार इस मामले को हेट क्राइम मानने से ही इनकार करती रही और तुरंत कोई क़दम भी नहीं उठाया। इस पर अदालत ने कहा- हमें इससे इनकार नहीं करना चाहिए कि इस देश में कुछ ऐसे लोग हैं, जिनका सांप्रदायिक नज़रिया है और वे आम तौरे पर ऐसा करते हैं।
प्रियांशु





