इस बार राखी 11अगस्त की शाम 8:30 बजे से शुरू होकर अगले दिन सुबह 7:15 बजे तक रहेगी

इस बार राखी 11अगस्त की शाम 8:30 बजे से शुरू होकर अगले दिन सुबह 7:15 बजे तक रहेगी

इस बार पवित्र त्योहार रक्षाबंधन के दिन तारीख को लेकर लोगों में संशय बना हुआ है। इस सन्दर्भ में काशी धर्म परिषद के महासचिव प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी ने त्योहार के तिथिवार को स्पष्ट किया है। उनका कहना है कि इस बार बहनों को भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के लिए 10 घंटे 10 मिनट का ही समय मिलेगा। यह समय 11 अगस्त की रात से 12 अगस्त को प्रातः काल तक मिलेगा।




श्री द्विवेदी के अनुसार 11 अगस्त को व्रत की पूर्णिमा और 12 अगस्त को स्नान- दान की पूर्णिमा है। श्रावण पूर्णिमा तिथि 11 अगस्त को सुबह 09:35 पर लगेगी जो कि 12 अगस्त को प्रातः 07.16 मिनट तक रहेगी। वहीं, श्रावण पूर्णिमा, 11 अगस्त को भद्रा सुबह 09.35 पर लग रही है जो रात 08.25 मिनट तक रहेगी। धर्मसिंधु में रक्षा पर्व मनाने के लिए "रक्षाबन्धनमस्यामेव पूर्णिमाया त्रिमुहूर्ऋधिकोद्रयण्यापिन्यामपराहणे प्रदोशे "

भद्रा के कारण इस बार १० घंटे 10 मिनट तक ही रक्षाबंधन त्योहार राखी बांधने का श्रेष्ठ समय रात 08.26 मिनट से 11.30 बजे तक और दूसरे दिन भोर 05.30 से प्रातः 07.16 तक

शास्त्र के अनुसार इस बार रक्षापर्व 11 अगस्त को रात्रि 08.26 से 12 अगस्त को प्रातः 07.16 तक किया जा सकेगा। इसमें भी राखी बांधने का श्रेष्ठ समय 11 अगस्त को रात 08.26 मिनट से 11.30 बजे तक और दूसरे दिन 12 अगस्त को भोर 05.30 से प्रातः 07.16 तक है।

12 अगस्त को प्रातः 07.16 के बाद भाद्र कृष्ण प्रतिपदा प्रारंभ हो जाएगा जो कि धर्मशास्त्रानुसार रक्षा पर्व के लिए निषेध माना गया है। वहीं, 12 अगस्त को पूर्णिमा संग उदयातिथि मिलने से वैदिक विप्र अपनी-अपनी शाखा की परम्परानुसार 'श्रावणी उपाकर्म करेंगे। प्राचीन परम्परानुसार ब्राह्मण वर्ग इसी दिन श्रावणी को मानता है। नदी तट पर गुरु अपने शिष्यों के साथ प्रातः श्रावणी उपाकर्म विधि-विधान से सम्पादित करते हैं। इसके पश्चात ऋषि पूजन एवं यज्ञोपवित पूजन का विधान है। यही शोधित एवं पूजीत यज्ञोपवित को भूदेवों द्वारा वर्ष भर धारण किया जाता है। इसका प्रचलन प्रायः पूरे देश में है।





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