मन की बात की 20वीं कड़ी में प्रधानमंत्री का सम्बोधन

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मन की बात की 20वीं कड़ी में प्रधानमंत्री का सम्बोधन
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प्रधानमंत्री ने कहा की जब मैं 'मन की बात' करता हूँ तो ऐसा लगता है, जैसे आपके बीच, आपके परिवार के सदस्य के रूप में उपस्थित हूँ।हमारी छोटी-छोटी बातें, जो एक-दूसरे को, कुछ, सिखा जाये, जीवन के खट्टे-मीठे अनुभव जो, जी-भर के जीने की प्रेरणा बन जाये - बस यही तो है 'मन की बात'। आज, 2021 की जनवरी का आखिरी दिन है। क्या आप भी मेरी तरह ये सोच रहे हैं कि अभी कुछ ही दिन पहले तो 2021 शुरू हुआ था ?लगता ही नहीं कि जनवरी का पूरा महीना बीत गया है - समय की गति इसी को तो कहते हैं

।राष्ट्र ने असाधारण कार्य कर रहे लोगों को उनकी उपलब्धियाँ और मानवता के प्रति उनके योगदान के लिए सम्मानित किया। इस साल भी, पुरस्कार पाने वालों में, वे लोग शामिल हैं, जिन्होंने, अलग-अलग क्षेत्रों में बेहतरीन काम किया है, अपने कामों से किसी का जीवन बदला है, देश को आगे बढ़ाया है। यानी, जमीनी स्तर पर काम करने वाले Unsung Heroes को पद्म सम्मान देने की जो परंपरा देश ने कुछ वर्ष पहले शुरू की थी, वो, इस बार भी कायम रखी गई है। मेरा आप सभी से आग्रह है, कि, इन लोगों के बारे में, उनके योगदान के बारे में जरुर जानें, परिवार में, उनके बारे में, चर्चा करें। देखिएगा, सबको इससे कितनी प्रेरणा मिलती है।

क्रिकेट टीम ने शुरुआती दिक्कतों के बाद, शानदार वापसी करते हुए ऑस्ट्रेलिया में सीरीज जीती। हमारे खिलाड़ियों का hard work और teamwork प्रेरित करने वाला है।इन सबके बीच, दिल्ली में, 26 जनवरी को तिरंगे का अपमान देख, देश, बहुत दुखी भी हुआ। हमें आने वाले समय को नई आशा और नवीनता से भरना है। हमने पिछले साल असाधारण संयम और साहस का परिचय दिया। इस साल भी हमें कड़ी मेहनत करके अपने संकल्पों को सिद्ध करना है। अपने देश को, और तेज गति से, आगे ले जाना है।

इस साल की शुरुआत के साथ ही कोरोना के खिलाफ हमारी लड़ाई को भी करीब-करीब एक साल पूरा हो गया है। जैसे कोरोना के खिलाफ भारत की लड़ाई एक उदाहरण बनी है, वैसे ही, अब, हमारा Vaccination programme भी, दुनिया में, एक मिसाल बन रहा है। आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा Covid vaccine programme चला रहा है।हम सबसे बड़े Vaccine programme के साथ ही दुनिया में सबसे तेज गति से अपने नागरिकों का Vaccination भी कर रहे हैं। सिर्फ 15 दिन में, भारत, अपने 30 लाख से ज्यादा, corona warrior का टीकाकरण कर चुका है, जबकि, अमेरिका जैसे समृद्ध देश को, इसी काम में, 18 दिन लगे थे और ब्रिटेन को 36 दिन।

'Made-in-India Vaccine', आज, भारत की आत्मनिर्भरता का तो प्रतीक है ही, भारत के, आत्मगौरव का भी प्रतीक है। NaMo App पर यू.पी. से भाई हिमांशु यादव ने लिखा है कि 'Made-in-India Vaccine' से मन में एक नया आत्मविश्वास आ गया है।मदुरै से कीर्ति जी लिखती हैं, कि उनके कई विदेशी दोस्त, उनको, message मैसेज भेजकर भारत का शुक्रिया अदा कर रहे हैं। कीर्ति जी के दोस्तों ने उन्हें लिखा है कि भारत ने जिस तरह कोरोना से लड़ाई में दुनिया की मदद की है, उससे भारत के बारे में, उनके मन में, इज्जत और भी बढ़ गई है। कीर्ति जी, देश का ये गौरवगान सुनकर, 'मन की बात' के श्रोताओं को भी गर्व होता है।आजकल मुझे भी अलग-अलग देशों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्रियों की तरफ से भारत के लिए ऐसे ही संदेश मिलते हैं। आपने भी देखा होगा, अभी, ब्राज़ील के राष्ट्रपति ने, ट्वीट करके जिस तरह से भारत को धन्यवाद दिया है, वो देखकर हर भारतीय को कितना अच्छा लगा। हजारों किलोमीटर दूर, दुनिया के दूर-सुदूर कोने के निवासियों को, रामायण के उस प्रसंग की इतनी गहरी जानकारी है, उनके मन पर गहरा प्रभाव है - ये हमारी संस्कृति की विशेषता है।

NaMo App और Mygov पर आपके messages, phone calls के माध्यम से आपकी बातें जानने का अवसर मिलता है। इन्हीं संदेशों में एक ऐसा भी संदेश है, जिसने, मेरा ध्यान खींचा - ये संदेश है, बहन प्रियंका पांडेय जी का। 23 साल की बेटी प्रियंका जी, हिन्दी साहित्य की विद्यार्थिनी हैं, और, बिहार के सीवान में रहती हैं। प्रियंका जी ने NaMo App पर लिखा है, कि वो, देश के 15 घरेलू पर्यटन स्थलों पर जाने के मेरे सुझाव से बहुत प्रेरित हुईं थीं, इसलिए, एक जनवरी को वो एक जगह के लिए निकलीं, जो बहुत खास थी। वे जगह थी, उनके घर से 15 किलोमीटर दूर, देश के पहले राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद जी का पैतृक निवास। प्रियंका जी ने बड़ी सुंदर बात लिखी है कि अपने देश की महान विभूतियों को जानने की दिशा में उनका ये पहला कदम था। प्रियंका जी को वहाँ डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद जी द्वारा लिखी गई पुस्तकें मिलीं, अनेक ऐतिहासिक तस्वीरें मिलीं। उन्होंने, एक तस्वीर भी साझा की है, जब पूज्य बापू, राजेंद्र जी के घर में रुके थे। वाकई, प्रियंका जी आपका यह अनुभव, दूसरों को भी, प्रेरित करेगा।इस वर्ष से भारत, अपनी आजादी के, 75 वर्ष का समारोह – अमृत महोत्सव शुरू करने जा रहा है। ऐसे में यह हमारे उन महानायकों से जुड़ी स्थानीय जगहों का पता लगाने का बेहतरीन समय है, जिनकी वजह से हमें आजादी मिली। मुंगेर के रहने वाले जयराम विप्लव जी ने मुझे तारापुर शहीद दिवस के बारे में लिखा है। 15 फरवरी, Nineteen thirty two, 1932 को, देशभक्तों की एक टोली के कई वीर नौजवानों की अंग्रेजों ने बड़ी ही निर्ममता से हत्या कर दी थी। उनका एकमात्र अपराध यह था कि वे 'वंदे मातरम' और 'भारत माँ की जय' के नारे लगा रहे थे। मैं उन शहीदों को नमन करता हूँ और उनके साहस का श्रद्धापूर्वक स्मरण करता हूँ। मैं जयराम विप्लव जी को धन्यवाद देना चाहता हूँ। वे, एक ऐसी घटना को देश के सामने लेकर आए, जिस पर उतनी चर्चा नहीं हो पाई, जितनी होनी चाहिए थी।

भारत के हर हिस्से में, हर शहर, कस्बे और गाँव में आजादी की लड़ाई पूरी ताकत के साथ लड़ी गई थी। भारत भूमि के हर कोने में ऐसे महान सपूतों और वीरांगनाओं ने जन्म लिया, जिन्होंने, राष्ट्र के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया, ऐसे में, यह, बहुत महत्वपूर्ण है कि हमारे लिए किए गए उनके संघर्षों और उनसे जुड़ी यादों को हम संजोकर रखें और इसके लिए उनके बारे में लिख कर हम अपनी भावी पीढ़ियों के लिए उनकी स्मृतियों को जीवित रख सकते हैं। मैं, सभी देशवासियों को और खासकर के अपने युवा साथियों को आह्वान करता हूं कि वे देश के स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में, आजादी से जुड़ी घटनाओं के बारे में लिखें। अपने इलाके में स्वतंत्रता संग्राम के दौर की वीरता की गाथाओं के बारे में किताबें लिखें।Young Writers के लिए India Seventy Five के निमित्त एक initiative शुरू किया जा रहा है। इससे सभी राज्यों और भाषाओं के युवा लेखकों को प्रोत्साहन मिलेगा।, पर्यावरण की रक्षा से कैसे आमदनी के रास्ते भी खुलते हैं, इसका एक उदाहरण अरुणाचल प्रदेश के तवांग में भी देखने को मिला। अरुणाचल प्रदेश के इस पहाड़ी इलाके में सदियों से 'मोन शुगु' नाम का एक पेपर बनाया जाता है। ये कागज यहाँ के स्थानीय शुगु शेंग नाम के एक पौधे की छाल से बनाते हैं, इसलिए, इस कागज को बनाने के लिए पेड़ों को नहीं काटना पड़ता है। इसके अलावा, इसे बनाने में किसी chemical का इस्तेमाल भी नहीं होता है, यानी, ये कागज पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित है, और स्वास्थ्य के लिए भी। एक वो भी समय था, जब, इस कागज का निर्यात होता था, लेकिन, जब आधुनिक तकनीक से बड़ी मात्रा में कागज बनने लगे, तो, ये स्थानीय कला, बंद होने की कगार पर पहुँच गई। अब एक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता कलिंग गोम्बू ने इस कला को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया है, इससे, यहाँ के आदिवासी भाई-बहनों को रोजगार भी मिल रहा है।

MyGov पर, महाराष्ट्र के जालना के डॉ. स्वप्निल मंत्री और केरल के पलक्कड़ के प्रहलाद राजगोपालन ने आग्रह किया है कि मैं 'मन की बात' में सड़क सुरक्षा पर भी आपसे बात करूँ। इसी महीने 18 जनवरी से 17 फरवरी तक, हमारा देश 'सड़क सुरक्षा माह' यानि 'Road Safety Month' भी मना रहा है। सड़क हादसे आज हमारे देश में ही नहीं पूरी दुनिया में चिंता का विषय हैं। आज भारत में Road Safety के लिए सरकार के साथ ही व्यक्तिगत और सामूहिक स्तर पर कई तरह के प्रयास भी किये जा रहे हैं। जीवन बचाने के इन प्रयासों में हम सबको सक्रिय रूप से भागीदार बनना चाहिए।आपने ध्यान दिया होगा, Border Road Organisation जो सड़कें बनाती है, उससे गुजरते हुए आपको बड़े ही innovative slogans देखने को मिलते हैं। 'This is highway not runway' या फिर 'Be Mr. Late than Late Mr.' ये slogans सड़क पर सावधानी बरतने को लेकर लोगों को जागरूक करने में काफी प्रभावी होते हैं। अब आप भी ऐसे ही innovative slogans या catch phrases, MyGov पर भेज सकते हैं। आपके अच्छे slogans भी इस अभियान में उपयोग किए जायेंगे।Road Safety के बारे में बात करते हुए, मैं NaMo App पर कोलकाता की अपर्णा दास जी की एक पोस्ट की चर्चा करना चाहूँगा। अपर्णा जी ने मुझे 'FASTag' Programme पर बात करने की सलाह दी है। उनका कहना है कि 'FASTag' से यात्रा का अनुभव ही बदल गया है। इससे समय की तो बचत होती ही है, Toll Plaza पर रुकने, cash payment की चिंता करने जैसी दिक्कतें भी खत्म हो गई हैं। अपर्णा जी की बात सही भी है। पहले हमारे यहाँ Toll Plaza पर एक गाड़ी को औसतन 7 से 8 मिनट लग जाते थे, लेकिन 'FASTag' आने के बाद, ये समय, औसतन सिर्फ डेढ़-दो मिनट रह गया है। Toll Plaza पर waiting time में कमी आने से गाड़ी के ईंधन की बचत भी हो रही है। इससे देशवासियों के करीब 21 हजार करोड़ रूपए बचने का अनुमान है, यानी पैसे की भी बचत, और समय की भी बचत। मेरा आप सभी से आग्रह है कि सभी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए, अपना भी ध्यान रखें और दूसरों का जीवन भी बचाएं।मेरे प्यारे देशवासियो, हमारे यहाँ कहा जाता है – "जलबिंदु निपातेन क्रमशः पूर्यते घटः"। अर्थात् एक एक बूँद से ही घड़ा भरता है। हमारे एक-एक प्रयास से ही हमारे संकल्प सिद्ध होते हैं। इसलिए, 2021 की शुरुआत जिन लक्ष्यों के साथ हमने की है, उनको, हम सबको मिलकर ही पूरा करना है तो आइए, हम सब मिलकर इस साल को सार्थक करने के लिए अपने अपने कदम बढ़ाएं। आप अपना सन्देश, अपने ideas जरुर भेजते रहिएगा। अगले महीने हम फिर मिलेंगे।

इति-विदा पुनर्मिलनाय !

(साभार पी.आई.बी.)

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