शाहजहां शेख पश्चिम बंगाल पुलिस की गिरफ्त में नहीं बल्कि मेहमान नवाजी में हैं : सुधांशु त्रिवेदी

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं राज्यसभा सांसद . सुधांशु त्रिवेदी ने पश्चिम बंगाल सीएम ममता बनर्जी द्वारा संदेशखाली में महिलाओं का यौन शोषण के आरोपी शाहजहां शेख की गिरफ्तारी के बाद उसे वीवीआईपी ट्रीटमेंट दिया जा रहा है। पश्चिम बंगाल पुलिस के साथ शाहजहां शेख जिस अकड़ के साथ पेश आ रहा है, उससे अंदाजा लगता है कि जेल के अंदर वह किस ठाठ के साथ रहेगा।
साथ ही, उन्होंने हाल ही कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद द्वारा पाकिस्तान के बारे में विवादित बयान देने पर अन्य कांग्रेसी नेताओं के पाकिस्तान प्रेम के तथ्यों को भी प्रमुखता से रखा। सुधांशु त्रिवेदी ने तमिलनाडु सरकार के विज्ञापन में चीन के ध्वज पर नाराजगी जताते हुए इंडी गठबंधन के सभी दलों पर सवाल भी खड़े किए। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि 56 दिन तक फरार रहने के बाद आज शाहजहां शेख को ईडी की धारा के तहत गिरफ्तार किया गया है, लेकिन उसके ऊपर संदेशखाली मामले को लेकर बलात्कार या बलात्कार के लिए प्रेरित करने की कोई भी धारा नहीं लगाई गई है, ऐसा क्यों? दूसरी ओर, ये भी साफ हो गया कि पश्चिम बंगाल की ममता सरकार द्वारा की गई गिरफ्तारी का संदेशखाली के गुनाहों से कोई लेना देना नहीं है और उनकी गिरफ्तारी पर बड़ा प्रश्न ये उठता है कि अगर शेख शाहजहाँ को प्रवर्तन निदेशालय की कार्यवाही के तहत गिरफ्तार किया गया है, तो ममता बनर्जी की सरकार उसे ईडी को क्यों नहीं सौंप रही है? ये सभी संकेत साफ तौर पर संदेह उत्पन्न करता है कि अब तक शेख शाहजहां ममता सरकार के संरक्षण में ही कहीं सुरक्षित था। अब उसे दोबारा हिफाजत देने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने उसे अपनी पुलिस की मेहमान-नवाजी में भेज दिया है। तथाकथित गिरफ्तारी के समय शेख शाहजहां की भाव भंगिमा और वहां की पुलिस के हाव भाव देखकर साफ पता चलता है उसे पुलिस की मेहमान नवाजी में ही भेजा गया है।
शेख शाहजहां के चेहरे पर कोई बेबसी और भय का भाव नहीं था। आमतौर पर किसी भी अपराधी की गिरफ्तारी के समय पुलिस आगे चलती है और अपराधी पुलिस जंजीरों में बंधा उनके पीछे चलता है, लेकिन यहां तो लग रहा था कि पुलिस शाहजहां शेख को सुरक्षा दे रही है। ममता बनर्जी की सरकार की संदेशखाली मामले में दिए गए सन्देश देश और समाज के लिए बहुत साफ है। शाहजहां शेख को अब तक ममता बनर्जी की सरकार सेक्युलर प्रोटेक्शन ही दे रही थी और अब तो उसे लीगल प्रोटेक्शन भी दे दी गई है।
सुधांशु त्रिवेदी ने तृणमूल कांग्रेस और इंडी गठबंधन दोनों से प्रश्न पूछा कि गिरफ्तारी के समय शेख शाहजहां द्वारा जीत का विक्ट्री साइन दिखाए जाने का क्या मतलब है? क्या वो महिलाओं के ऊपर अत्याचार, दमन, उत्पीड़न दुष्कर्म और उनकी जमीन पर अवैध कब्जा करने को विजय बता रहा है? महिलाओं पर अत्याचार और उत्पीड़न को विजय का प्रतीक बताना मध्यकालीन मुगलिया मानसिकता का प्रतीक है। 21वीं सदी में शेख शाहजहां और ममता बनर्जी की सरकार मुगलिया मानसिकता से शासन करते हुए दिखाई दे रही है। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस के पाकिस्तान प्रेम पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति ईर्ष्या और वैमनस्य में इंडी गठबंधन अपने निम्नतम स्तर पर गिर चुका है। इसका नवीनतम उदाहरण ये है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बीके हरिप्रसाद ने तो आज ये तक कह दिया कि पाकिस्तान भाजपा का दुश्मन है, कांग्रेस का नहीं। ये बीके हरिप्रसाद या कांग्रेस के किसी नेता की जुबान से फिसला हुआ बयान नहीं है क्योंकि इससे पूर्व, कांग्रेस के पूर्व कैबिनेट मंत्री मणिशंकर अय्यर और सलमान खुर्शीद भी पाकिस्तान जाकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को हटाने के लिए मदद मांगी थी।
राहुल गांधी के बयान को पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र में भारत के खिलाफ इस्तेमाल किया था। इमरान खान ने बतौर प्रधानमंत्री तत्कालीन पंजाब कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू की तरफ इशारा करते हुए कहा था कि भारत में भाजपा की सरकार रहते हुए पाकिस्तान से रिश्ते अच्छे नहीं होंगे, ये संबंध कांग्रेस की सरकार बनने पर ही बेहतर होंगे। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि एकतरफ कांग्रेस अपराधी और आतंकवादी तत्वों को समर्थन देती रही, तो दूसरी तरफ खुलेआम ऐसे बयान दे रहे हैं जो साफ दर्शाते हैं कि राहुल गांधी और इंडी गठबंधन की मोहब्बत की दुकान में पाकिस्तान के लिए मोहब्बत ज्यादा है।
डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि 2010 में बराक ओबामा ने अपनी किताब द प्रॉमिस्ड लैंड में भारत की यात्रा के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ हुई वार्ता के आधार पर लिखा है कि 2008 के 26/11 हमले के बाद भारतीय सेना जवाबी कार्यवाही करने के लिए तैयार थी, परन्तु कांग्रेस सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कार्यवाही होने से भाजपा को फायदा होने की आशंका से ये कार्यवाही नहीं की। कांग्रेस सरकार पहले सैंकड़ों लोगों की मृत्यु और पीड़ित महिलाओं के दर्द को सियासत के तराजू पर तौलकर अपना वोटबैंक साधती है और उसके आधार पर ही कार्यवाही करती है। कांग्रेस तो देश की सुरक्षा और आत्मसम्मान को भी राजनीति के तराजू पर तौलती है।





