शबरिमला सोना चोरी केस: वैज्ञानिक जांच में सामने आए कई पहलू

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शबरिमला सोना चोरी केस: वैज्ञानिक जांच में सामने आए कई पहलू
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शबरिमला सोना चोरी मामले में वैज्ञानिक जांच ने कई अहम सवालों पर विराम लगा दिया है। इसरो के वैज्ञानिकों ने पुष्टि की है कि गर्भगृह के दरवाजे के पैनल बदले नहीं गए थे, बल्कि तांबे की चादरों पर चढ़ी सोने की परत को रासायनिक प्रक्रिया के जरिए उतारा गया था। ये निष्कर्ष विशेष जांच दल (SIT) को सौंपे गए हैं और बुधवार को केरल हाईकोर्ट के समक्ष भी रखे गए हैं।

इसने गर्भगृह के ढांचे को पूरी तरह बदलने या अंतरराष्ट्रीय गिरोहों को सौंपे जाने जैसी अटकलों को खारिज कर दिया गया है। विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के वैज्ञानिकों ने विश्लेषण के बाद अदालत को बताया कि शबरिमला में लगे दरवाजों के पैनल मूल तांबे की चादरें ही हैं। हिस्सा ठोस सोना नहीं था, बल्कि तांबे के ऊपर चढ़ी सोने की परत थी, जिसे पहले ठोस सोने का पैनल समझा जा रहा था।

वैज्ञानिकों के अनुसार, जिन चादरों को हटाकर बाद में दोबारा लगाया गया था, उनके नमूनों में सोने की मात्रा में कमी पाई गई है। इससे साबित होता है कि तांबे को नुकसान पहुंचाए बिना सोने को अलग किया गया है। सोना निकालने में पारा औरअन्य रासायनिक घोल का इस्तेमाल किया गया है।

वैज्ञानिकों ने यह भी कहा कि इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि मूल चादरों को हटाकर नई चादरें लगाई गई हों। इन सभी परीक्षणों को शामिल करते हुए अंतिम संयुक्त रिपोर्ट जल्द ही सौंपी जाएगी। यह वैज्ञानिक गवाही जांच की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। अब जांच का फोकस सोना निकालने की प्रक्रिया और इसके पीछे जिम्मेदार लोगों की पहचान पर केंद्रित होगा।

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