राष्ट्रपति भवन में हुआ भारतीय गवर्नर जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण

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राष्ट्रपति भवन में हुआ भारतीय गवर्नर जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण
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राष्ट्रपति भवन में भारत के पहले गवर्नर जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी के जीवन और विरासत का स्मरणोत्सव मनाया जा रहा है। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में चक्रवर्ती राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण किया। अशोक मंडप के पास भव्य सीढ़ी पर राजगोपालाचारी की प्रतिमा की स्‍थापना एडविन लुटियंस की प्रतिमा के स्थान पर की गई है।

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, डॉ. एस. जयशंकर, धर्मेंद्र प्रधान, गजेंद्र सिंह शेखावत, डॉ. एल. मुरुगन और चक्रवर्ती राजगोपालाचारी के परिवार के सदस्य भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि चक्रवर्ती राजगोपालाचारी भारत के महान सपूत थे। राष्ट्रपति ने कहा कि राजगोपालाचारी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे और उनमें अनेक प्रतिभाएं थीं। विधि पेशे, स्वतंत्रता संग्राम, सामाजिक और आर्थिक सुधारों, प्राचीन भारतीय ग्रंथों, राजनीति और शासन में उनके योगदान ने उन्हें बहुत समृद्ध बनाया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि चक्रवर्ती राजगोपालाचारी ने देश के इतिहास पर अमिट छाप छोड़ी है। उन्‍होंने कहा कि राजगोपालाचारी के आदर्शों पर कार्य करना ही उन्हें दी जाने वाली सच्ची श्रद्धांजलि होगी। राष्ट्रपति ने आशा व्यक्त की कि देश की जनता राजगोपालाचारी के जीवन और विरासत से प्रेरणा लेकर राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ आगे बढ़ेगी।

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने इस अवसर पर कहा कि भारत का औपनिवेशिक प्रभाव से मुक्ति का सफर कोई एक घटना नहीं है, बल्कि यह शासन, कानून, शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्रीय पहचान के क्षेत्र में सतत परिवर्तन है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के ‘गुलामी की मानसिकता से आजादी’ के दृष्टिकोण को कई पहलों के माध्यम से साकार किया गया है।

उपराष्ट्रपति ने इस बात पर प्रकाश डाला कि राजभवन लोकभवन में परिवर्तित हो रहे हैं, प्रधानमंत्री कार्यालय सेवा तीर्थ में बदल रहा है और केंद्रीय सचिवालय कर्तव्य भवन में रूपांतरित हो रहा है, ये सभी सरकार की सेवा भावना की झलक हैं।

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी का संदेश पढ़ा, जिसमें प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति भवन के ऐतिहासिक केंद्रीय प्रांगण में राजाजी की प्रतिमा के अनावरण को देशवासियों के लिए अपार गौरव का क्षण बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि राजाजी उत्सव समारोह, जिसमें पुस्तक और पैनल प्रदर्शनी, फिल्म प्रदर्शन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की एक श्रृंखला शामिल है, महान नेता की गौरवशाली विरासत को श्रद्धांजलि है। श्री मोदी ने यह भी कहा कि औपनिवेशिक काल के चित्रों और कलाकृतियों को भारत की अपनी कलात्मक परंपराओं में निहित कृतियों से प्रतिस्थापित करना उल्लेखनीय प्रयास है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि संप्रभुता न केवल राजनीतिक और आर्थिक क्षेत्रों में, बल्कि सांस्कृतिक क्षेत्रों में भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज राष्ट्रपति भवन सत्ता का केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता में निहित लोकतांत्रिक आत्मविश्वास का प्रत्यक्ष प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राजाजी उत्सव और चक्रवर्ती राजगोपालाचारी की प्रतिमा के अनावरण जैसी पहल इस दिशा को और मजबूत करती हैं।

इस अवसर पर सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने कहा कि राजाजी की बौद्धिक गहराई, नैतिक साहस और राष्ट्रीय सेवा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। उन्‍होंने कहा कि वे न केवल एक दूरदर्शी राजनीतिक व्यक्तित्व थे, बल्कि रामायण और महाभारत का अंग्रेजी तथा तमिल में अनुवाद करके उन्होंने सांस्कृतिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

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