रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए सशस्त्र बलों, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग के बीच सहयोग जरूरी: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता रक्षाबलों, अनुसंधान और विकास संस्थानों तथा उद्योग के बीच निर्बाध सहयोग के...

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता रक्षाबलों, अनुसंधान और विकास संस्थानों तथा उद्योग के बीच निर्बाध सहयोग के...
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता रक्षाबलों, अनुसंधान और विकास संस्थानों तथा उद्योग के बीच निर्बाध सहयोग के जरिए ही हासिल की जा सकती है। उन्होंने भारत की रक्षा विनिर्माण परिस्थितिकी को मजबूत करने तथा प्रौद्योगिकी को अपनाने की प्रक्रिया तेज करने के लिए अधिक से अधिक संवाद तथा विकास और उत्पादन के संयुक्त प्रयासों का आह्वान किया। नई दिल्ली में डीआरडीओ-इंडस्ट्री सिनर्जी मीट ‘विमर्श में श्री सिंह ने कहा कि डी आर डी ओ ने मिसाइल से लेकर रडार तक, लडाकू विमानों से लेकर पनडुब्बियों तक, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक हर क्षेत्र में क्षमताओं का प्रदर्शन किया है।
श्री सिंह ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में रक्षा क्षेत्र में किए गए सुधार अभूतपूर्व हैं और कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। इनमें सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची, मेक इन इंडिया पहल, आईडीईएक्स अदिति तथा रक्षा अनुसंधान और विकास बजट की 25 प्रतिशत राशि निजी क्षेत्र के लिए आवंटित करने के फैसले शामिल हैं। श्री सिंह ने कहा कि ये उपाय यह सुनिश्चित करने के लिए किए गए हैं कि भारत रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भर न रहे और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढे।
रक्षा मंत्री ने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। कलपुर्जों, आवश्यक सेवाओं तथा अन्य प्रणालियों में इनका महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि इन उद्यमों को गुणवत्ता, समय पर आपूर्ति, नवाचार और वैश्विक मानकों पर लगातार ध्यान देना होगा। उन्हें बड़ी कंपनियों के साथ साझेदारी भी बढ़ानी होगी।
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत में रक्षा क्षेत्र में स्टार्टअप की नई लहर उभर रही है। उन्होंने कहा कि ये स्टार्टअप न केवल नवाचार कर रहे हैं, बल्कि तेजी से काम करने में सक्षम हैं और रक्षा विनिर्माण के पारंपरिक मॉडल में बदलाव ला रहे हैं। उन्होंने कहा कि वित्तीय सहायता, मार्गदर्शन और बाजार तक पहुंच मिलने से रक्षा क्षेत्र में इन स्टार्टअप के लिए अवसर बढ़े हैं। श्री सिंह ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक रूप से मजबूत राष्ट्र बनाना नहीं है बल्कि देश को प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना, सामाजिक रूप से समावेशी, पर्यावरण के लिहाज से टिकाऊ और रणनीतिक रूप से सुरक्षित बनाना है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि देश के पास अपने भविष्य को दिशा देने के लिए तकनीकी क्षमता है और आत्मनिर्भरता देश के चरित्र और दृष्टिकोण का अभिन्न अंग होनी चाहिए।
इस अवसर पर अत्याधुनिक प्रणालियों के वाणिज्यिक उत्पादन में सक्षम बनाने के लिए 13 कंपनियों को प्रौद्योगिकी अंतरित करने के लिए नौ समझौते किए गए। डी आर डी ओ ने उन्नत विनिर्माण आकलन प्रणाली के लिए तथा घरेलू रक्षा उपक्रमों की विनिर्माण परिपक्कवता की बेंचमार्किंग के लिए दूसरे रेटिंग वर्जन के लिए भारतीय गुणवत्ता परिषद के साथ समझौते पर भी हस्ताक्षर किए।





