आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बसपा सुप्रीमो मायावती कर सकती हैं छोटे दलों के साथ गठबंधन।
बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अगले वर्ष होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले ही शिरोमणि अकाली दल से...

बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अगले वर्ष होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले ही शिरोमणि अकाली दल से...
बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अगले वर्ष होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले ही शिरोमणि अकाली दल से गठबंधन कर लिया है। जाहिर है कि पहले भी मायावती को गठबंधन की राजनीति अधिक पसंद आती थी फिर बात उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की हो या अन्य राज्यों की।
गौरतलब है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने सपा से गठबंधन किया था। लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद उन्होंने अपना गठबंधन तोड़ दिया हालांकि चुनाव से पहले ही दोनों पार्टियों के बीच में तनाव देखा जा रहा था। पर इस बार बसपा का दाव इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यूपी में बसपा ने जब-जब गठबंधन किया, उनके लिए संजीवनी ही साबित हुआ है, लेकिन बाहरी राज्यों में उनकी दाल नहीं गली।
आपको बता दें कि वर्ष 1993 में बसपा ने समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर पहली बार चुनाव लड़ा और यूपी की मुख्यमंत्री बनी। लेकिन, 18 माह बाद गेस्ट हाउस कांड के चलते मायावती ने यह गठबंधन तोड़ दिया। वर्ष 1996 में कांग्रेस से मिल कर विधानसभा चुनाव लड़ा तो बसपा के वोट प्रतिशत में इजाफा हुआ। वर्ष 2019 में बसपा ने सपा और रालोद संग मिलकर चुनाव लड़ा, जिसमें बसपा की सीटें शून्य से 10 तक पहुंच गई।
लेकिन, खास बात यह है कि बसपा के साथ किसी भी दल का गठबंधन लंबा नहीं चला। खुद मायावती ने गठबंधन तोड़ने का ऐलान किया।गौरतलब है कि आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले ऐसी अटकले लगाई जा रही हैं कि बसपा यूपी के छोटे-छोटे दलों से गठबंधन कर सकती है।
हालांकि कुछ महीने पहले मायावती ने साफ कहा था कि वह इस बार उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी। परंतु अब चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी और सपा समेत बसपा तथा अन्य दल भी गठबंधन की रणनीति बना रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सूबे के कई छोटे-छोटे दल बसपा से गठबंधन करने को उत्सकु हैं। इनमें ओम प्रकाश राजभर की अगुआई वाला भागीदारी संकल्प मोर्चा और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम प्रमुख हैं, लेकिन इन्हें अभी मायावती की ओर से हरी झंडी का इंतजार है।
नेहा शाह