पंडालों में माँ का दर्शन कर भाव विभोर हुए भक्त,आज होगा महाष्टमी पूजन

पंडालों में माँ का दर्शन कर भाव विभोर हुए भक्त,आज होगा महाष्टमी पूजन

लखनऊ : ढाक की थाप से गुंजायमान होता वातावरण, धुनुची नृत्य में मग्न लोग और माँ का दर्शन कर छलकती भक्तों की आँखे यह नज़ारे थे शहर की दुर्गा पूजा पंडालों के। भव्य पंडालों में विराजमान माँ शक्ति के दरबार में मंगलवार को महासप्तमी का पूजन हुआ। पुष्पांजलि और आरती वंदन के बाद भक्तों में माँ के भोग और प्रसाद का वितरण हुआ। शहर की सबसे पुरानी बंगाली क्लब की दुर्गा पूजा में अधिवास पूजन हुआ जिसमे नौ तरह के पेड़ों को स्नान करवाकर उनका पूजन किया गया। उसके बाद भक्तों को माँ के भोग का वितरण हुआ। शहर के सबसे भव्य पंडालों में से एक मॉडल हाउस के दुर्गा पूजा पंडालों में भी दिन भर दर्शनार्थियों का तांता लगा रहा। शाम में पंडाल के दर्शन के लिए कैबिनेट मंत्री जितिन प्रसाद का आगमन हुआ जिन्होंने पूजा पंडाल में मां का पूजन किया। आपको बताते चलें कि मॉडल हाउस के भव्य मंदिरनुमा पंडाल को बंगाल के असीन मैटिया ग्रुप द्वारा तैयार किया गया है। चौक की श्री श्री सार्वजनिक दुर्गा पूजा में भक्तों को मास्क वितरित किये गए तो वहीँ रामकृष्ण मठ की दुर्गा पूजा में अभिजीत रायचौधरी ने सरोद वादन और सारंग पांडेय ने तबला वादन कर श्रद्धालुओं को भक्ति रस से सराबोर कर दिया।

*बुधवार को होगी महाष्टमी और संधि पूजा*

बुधवार को पूजा पंडालों में महाष्टमी का पूजन होगा जिसमे कन्याएं खिलाई जाएंगी और महिलाएं माँ को श्रृंगार का सामान भी अर्पित करेंगी। अष्टमी और नवमी की संधि पर होने वाली संधि पूजा भी कल देर रात 11.25 से शुरू होगी जो कि रात 12 .13 तक चलेगी। बंगाली क्लब कि उपाध्यक्ष इनाक्षी सिन्हा जी ने बताया कि दुर्गा पूजा में संधि पूजन का विशेष महत्व है। कहते है माँ ने महिषासुर नाम के राक्षस का वध अष्टमी और नवमी की संधि के समय ही किया था इसके अलावा वध के समय राक्षस महिष अर्थात भैंसे के रूप को त्याग रहा था और असुर रूप में आ रहा था उसी संधि रूप में माँ ने उसका संहार किया था। तभी से संधि पूजा का विधान चलता चला आ रहा है। संधि पूजन अष्टमी के अंत के 24 मिनट और नवमी के प्रारम्भ के 24 मिनट के काल में होता है। पूजन में 108 कमल का प्रयोग किया जाता है और 108 ही दिए जलाये जाते है। कहते है श्री राम ने रावण पर विजय से पूर्व भी यही पूजन किया था जिससे प्रसन्न होकर माँ ने उन्हें विजयी होने का आशीर्वाद दिया था और उन्होंने रावण पर विजय प्राप्त की थी।

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