राजस्थान हाई कोर्ट ने वैक्सीन के दामों को लेकर केंद्र सरकार राज्य सरकार और सिरम इंस्टीट्यूट से मांगा जवाब.....
वैश्विक महामारी कोरोनावायरस से लड़ने के लिए वैक्सीनेशन की प्रक्रिया देरी से शुरू की गई है, जिनमें 1 मई से 18 वर्ष से सभी लोगों को टीकाकरण किया जाएगा।...

वैश्विक महामारी कोरोनावायरस से लड़ने के लिए वैक्सीनेशन की प्रक्रिया देरी से शुरू की गई है, जिनमें 1 मई से 18 वर्ष से सभी लोगों को टीकाकरण किया जाएगा।...
वैश्विक महामारी कोरोनावायरस से लड़ने के लिए वैक्सीनेशन की प्रक्रिया देरी से शुरू की गई है, जिनमें 1 मई से 18 वर्ष से सभी लोगों को टीकाकरण किया जाएगा। ऐसे में विपक्ष और जनता द्वारा लगातार वैक्सीन के दामों को लेकर केंद्र सरकार को घेरे में लिया गया था। आपको बता दें कि राजस्थान हाई कोर्ट ने कोरोनावायरस की वैक्सीन की कीमत केंद्र सरकार राज्य सरकार और निजी अस्पतालों के लिए अलग-अलग रखने एवं कंपनियों की ओर से मुनाफा की वसूली करने पर केंद्र और राज्य सरकार सहित सिरम इंस्टीट्यूट और बायोटेक को नोटिस जारी करके जवाब मांगा।
गौरतलब है कि याचिका में अदालत को बताया गया कि वैक्सीन के नाम पर निर्माता कंपनी मुनाफा वसूल कर रही हैं। याचिका में लिखा गया कि एक ही वैक्सीन की कीमत केंद्र सरकार के लिए अलग और राज्य सरकार के लिए अलग-अलग तय की गई है। याचिका में लिखा गया कि सिरम इंस्टीट्यूट अपनी वैक्सीन कोविशील्ड केंद्र सरकार को 150 रुपये, राज्य सरकार को 400 रुपये और निजी अस्पतालों को 600 रुपये में देना तय किया है. इसी तरह भारत बायोटेक अपनी कोवैक्सीन के 600 रुपये और 1200 रूपए तक लेने का निर्णय किया है. यह कीमत विश्व में सबसे अधिक है। परंतु नियमों के अनुसार कोई भी निर्माता कंपनी सिर्फ 16% तक ही मुनाफा कमाने के लिए आदेशित है। उन्होंने बताया कि यह कंपनी 800 फ़ीसदी मुनाफा वसूल कर रहे हैं।
याचिका में कहा गया कि पीएम केयर्स फंड में 9 जुलाई तक 30 अरब रुपए से अधिक पैसा जमा हो चुका है। केंद्र सरकार की ओर से भी सभी को फ्री वैक्सीन लगवाई जाए और वैक्सीन निर्माताओं को वैक्सीन की न्यूनतम कीमत ही वसूलने का निर्देश दे दिया जाए। याचिका में कहा गया कि महामारी के दौरान आम आदमी वैक्सीन की बढ़ती कीमतों को नहीं उठा पाएगा, जिसके कारण टीकाकरण की दरें कम हो सकती हैं।
नेहा शाह





