मध्यप्रदेश में ब्लैक फंगस के बढ़ते मामलों को लेकर बोला उच्च न्यायालय कहा- उपलब्ध इंजेक्शन की संख्या ऊंट के मुंह में जीरे के बराबर....
मध्य प्रदेश में ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और आंकड़े आगे डरावने हो सकते हैं। मध्य प्रदेश की स्थिति को देखते हुए हाईकोर्ट ने...

मध्य प्रदेश में ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और आंकड़े आगे डरावने हो सकते हैं। मध्य प्रदेश की स्थिति को देखते हुए हाईकोर्ट ने...
मध्य प्रदेश में ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और आंकड़े आगे डरावने हो सकते हैं। मध्य प्रदेश की स्थिति को देखते हुए हाईकोर्ट ने सोमवार को सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि हम दुर्दशा से भलीभांति वाकिफ हैं। बता दें कि जजों की पीठ चीफ जस्टिस मोहम्मद रफ़ी और जस्टिस अतुल श्रीधरण की युगल ने कहा कि उपलब्ध इंजेक्शन की संख्या ऊंट में ऊंट के मुंह में जीरे के बराबर है। इस की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए एक सप्ताह बाद इस मामले की सुनवाई होगी।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा कोरोनावायरस से जुड़े मामलों पर संज्ञान पर आधारित मूल्य जनहित याचिका और 1 दर्जन से अधिक हस्तक्षेप याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की। इस सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि हम मामले में केंद्र और राज्य सरकार की ओर से समय-समय पर दिशा निर्देश जारी कर रहे हैं। हाई कोर्ट सरकार की ओर से बताया गया कि प्रदेश के लिए एक करोड़ वैक्सीन ग्लोबल टेंडर से खरीदी जाएंगी सितंबर तक प्रदेश की लगभग तीन करोड़ जनता को वैक्सीन की पहली डोज लग जाएगी। जिस पर स्टेट बार कौंसिल के पूर्व सदस्य सुनील गुप्ता की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ राधेलाल गुप्ता ने तर्क दिया कि ग्लोबल टेंडर को महज एक करोड़ तक सीमित ना करते हुए चरणबद्ध तरीके से 5 करोड़ तक ले जाया जाए।
आपको बता दें कि इससे पहले कोर्ट मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता नमन की तरफ से प्रस्तुत चारों अंतिम आवेदन पर विचार किया गया। पहला आवेदन मरीजों के इलाज के लिए अधिकतम रेट निर्धारण। दूसरा ब्लैक फंगस और तीसरा कोरोना की तृतीय लहर और चौथा वैक्सीनेशन से संबंधित था। इसी के साथ केंद्र सरकार से प्राप्त ब्लैक फंगस के 6,426 इंजेक्शन तीसरी लहर को लेकर पूर्व तैयारियों के अलावा जनवरी 2022 तक संपूर्ण वैक्सीनेशन के लक्ष्य को पूर्ण करने की जानकारी दी गई। जिसके बाद हाईकोर्ट ने प्रतिक्रिया करते हुए कहा कि निजी अस्पतालों को कोरोनावायरस का रेट बढ़ाने की खुली छूट नहीं दी जा सकती है, बेहतर यही होगा कि पैकेज तय करने जैसी गलती ना करते हुए कमेटी में कोर्ट मित्र और निजी अस्पताल के प्रतिनिधियों को शामिल कर सहमति बनाई जाए।
नेहा शाह





