दीदी ओ दीदी ,ऐसा तुम्ही कर सकती हो , बंगाल के विकास की बलि देंगी ममता
एक तरफ तूफ़ान यास है जिसमे लाखो लोगो को बेघर होना पड़ा है | उड़ीसा , बंगाल, में इसका प्रभाव ज्यादा है पर झारखण्ड , बिहार सहित देश के अन्य हिस्सों में भी...

एक तरफ तूफ़ान यास है जिसमे लाखो लोगो को बेघर होना पड़ा है | उड़ीसा , बंगाल, में इसका प्रभाव ज्यादा है पर झारखण्ड , बिहार सहित देश के अन्य हिस्सों में भी...
एक तरफ तूफ़ान यास है जिसमे लाखो लोगो को बेघर होना पड़ा है | उड़ीसा , बंगाल, में इसका प्रभाव ज्यादा है पर झारखण्ड , बिहार सहित देश के अन्य हिस्सों में भी लोगो को इससे नुकसान पंहुचा है |
अब जब देश का प्रधानमंत्री हालात का जायजा लेने निकला और उड़ीसा के बाद बंगाल पंहुचा तो पहले दीदी मीटिंग में आधे घण्टे प्रधानमंत्री और राज्यपाल को इंतजार करवाती है | अब आती है तो उनके पास वक़्त नहीं होता | वो प्रधानमंत्री को बंगाल की मांग सौप किसी अन्य मीटिंग में जाने के लिए निकल जाती है , वो भी तब जब प्रधानमंत्री और राज्यपाल अभी भी है |
दीदी ने बताया कि उन्होंने सुंदरबन के लिए दस हजार करोड़ और और दीघा के विकास के लिए भी दस हजार करोड़ माँगा है | अब दीदी को मालूम नहीं की सिर्फ मांगने से तो मिलता नहीं | आपको बताना भी होगा की ये पैसा आप कैसे खर्च करेंगे | कोई योजना होती तो प्रधानमंत्री से भी बताती और सलाह लेती |
पर ये तो बंगाल की दीदी ही कर सकती है | उन्होंने प्रधानमंत्री को बंगाल चुनाव की कड़वाहट की याद अपने हरकतों से दिला दी और बताया की वो अब भी केंद्र से नाराज है और इनकी ये नाराजगी तब तक ख़त्म नहीं होगी जब तक केंद्र में मोदी की जगह कोई और प्रधानमंत्री नहीं बन जाता |
पश्चिम बंगाल का आज का घटनाक्रम स्तब्ध करने वाला है। मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री व्यक्ति नहीं संस्था है। दोनों जन सेवा का संकल्प और संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ लेकर दायित्व ग्रहण करते हैं।
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) May 28, 2021
अब दीदी को पता नहीं की अगले चार साल तो मोदी ही रहेंगे और अगर बंगाल का विकास करना है तो प्रधानमंत्री के पास तो जाना ही होगा | और अगर वो नहीं जाती तो उनके पांच साल में से चार साल तो मोदी के ही कार्यकाल में निकल जाएगा | और अंतिम साल तो चुनाव का साल होगा |
पर अपनी जिद में अडी ममता बनर्जी के सामने बंगाल नहीं उनका अहम् ज्यादा महत्वपूर्ण है | बंगाल का क्या इतने दिनों से विकास रुका है तो चार साल और सही | पर दीदी ये क्या गारंटी है की चार साल के बाद मोदी नहीं होंगे | अगर जनता ने उनको फिर से प्रधानमंत्री बना दिया तो आप क्या और इंतजार करेंगी | इससे अच्छा ये होता कि आप राजधर्म अपनाती | अपना नहीं जनता का ख्याल कर प्रधानमंत्री के साथ अच्छे रिश्ते बना बंगाल को विकास के रास्ते पर ले कर आती |
When Hon PM Shri @narendramodi stands strong with the citizens of West Bengal in wake of cyclone Yaas, Mamata ji should also set aside her ego for the welfare of people. Her absence from the PM's meeting is murder of constitutional ethos & the culture of cooperative federalism.
— Jagat Prakash Nadda (@JPNadda) May 28, 2021
भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जेपी नड्डा ने तो यहाँ तक कह कर ट्वीट कर दिया कि ये संविधान के मर्यादा और फेडरल सिस्टम की हत्या के समान है | उनके कृत्य की ट्विटर पर लोगो में जम कर चर्चा हो रही है |
Two CM's Attitude on #CycloneYaas :
— Nikhil Singh (@nkvws) May 28, 2021
Odisha CM : State Won't burden Central govt for Cyclone Yaas relief during the pandemic, will handle on its Own
WB CM : Mamata Banerjee and state officers' Abstain from PM Narendra Modi's review meeting for Relief of State pic.twitter.com/7ZqHcCzhgP
उड़ीसा के मुख्यमंत्री के पक्ष में ट्विटर पर एक सज्जन लिखते है कि केंद्र को परेशान होने की जरुरत नहीं है वो यास तूफान को खुद ही संभाल लेंगे | वही दूसरी और एक मुख्यमंत्री है जो आती ही नहीं है |





