बाराबंकी रामसनेहीघाट स्थित मस्जिद गिराए जाने का मामला ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा लखनऊ हाई कोर्ट में किया गया दर्ज

बाराबंकी रामसनेहीघाट स्थित मस्जिद गिराए जाने का मामला ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा लखनऊ हाई कोर्ट में किया गया दर्ज

बाराबंकी के रामसनेहीघाट तहसील में नवाज मस्जिद गिराए जाने के मामले को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ का रुख अपनाया था। मुस्लिम बोर्ड के वकील ने रईस ने शनिवार को बताया कि उन्होंने मामले की गंभीरता को समझते हुए शुक्रवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के समक्ष याचिका दायर की थी।

आपको बता दें कि बोर्ड ने रामसनेहीघाट के तत्कालीन उपजिलाधिकारी दिव्यांशु पटेल की अदालत द्वारा मस्जिद गिराए जाने के गत 3 अप्रैल के आदेश को भी रद्द करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने भी इस मामले में एक याचिका दायर की है, जिसमें रामसनेहीघाट तहसील के उपजिलाधिकारी द्वारा 3 अप्रैल को पारित आदेश को रद्द करने तथा स्थानीय अधिकारियों को ध्वस्त की गई मस्जिद का पुनर्निर्माण कराने का आदेश देने और मस्जिद प्रबंध समिति को विवादित भूमि पर मस्जिद के पुनर्निर्माण की अनुमति देने की मांग के साथ वक्फ भूमि और संपत्ति पर जिस स्वतंत्रता संग्राम स्मारक बाल उदयान का उदघाटन किया है उसका उपयोग को बंद करने का निर्देश देने के आदेश संबंधी अनुरोध शामिल हैं।

गौरतलब है कि राम सनेही घाट में उप जिलाधिकारी आवास के सामने स्थित एक पुरानी मस्जिद को पिछली 17 मई को प्रशासन ने कड़े सुरक्षा बंदोबस्त के बीच ध्वस्त करा दिया था और उसका मलबा भी हटवा दिया था। जिसके बाद वहां के जिलाधिकारी आदर्श सिंह ने इस बारे में अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि वह मस्जिद नहीं बल्कि अवैध आवासीय परिसर था, जिसे राम सनेही घाट उप जिला मजिस्ट्रेट के पिछली

लखनऊ स्थित टीले वाली मस्जिद के सह-मुतवल्ली मौलाना वासिफ ने गत एक जून को महाधिवक्ता को भेजे गए पत्र में उन्होंने कहा कि बाराबंकी के जिलाधिकारी आदर्श सिंह और राम सनेही घाट के तत्कालीन उपजिलाधिकारी दिव्यांशु पटेल ने उच्च न्यायालय के गत 24 अप्रैल के फैसले की अनदेखी करके अत्यंत पूर्वाग्रहपूर्ण रवैया अपनाते हुए अवैध तरीके से 100 साल पुरानी मस्जिद को पिछली 17 मई को ध्वस्त करा दिया।

नेहा शाह

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