वाल्मीकि की तुलना तालिबान से करने पर कोर्ट ने नहीं दी मुनव्वर राणा को जमानत।
मुनव्वर राणा को लखनऊ हाई कोर्ट से रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि की तुलना तालिबान से करने के मामले में अभी तक किसी प्रकार की राहत नहीं मिली है। बता...

मुनव्वर राणा को लखनऊ हाई कोर्ट से रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि की तुलना तालिबान से करने के मामले में अभी तक किसी प्रकार की राहत नहीं मिली है। बता...
मुनव्वर राणा को लखनऊ हाई कोर्ट से रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि की तुलना तालिबान से करने के मामले में अभी तक किसी प्रकार की राहत नहीं मिली है। बता दें कि कोर्ट ने आपराधिक केस में उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया साथ ही एफआईआर को चुनौती देने वाली याचिका भी खारिज कर दी।
आपको बता दें कि जज रमेश सिन्हा व सरोज यादव की बेंच ने गुरुवार को यह आदेश राणा की याचिका पर दिया। इस याचिका में खुद की गिरफ्तारी पर रोक लगाने की गुजारिश कोर्ट से की गई थी।
गौरतलब है कि समाजिक सरोकार फाउंडेशन संस्था की तरफ से शायर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवाई गई थी। प्राथमिकी में कहा गया कि राना ने भगवान वाल्मीकि की तुलना तालिबान से करके हिंदू आस्था का अपमान किया।
सभी जानते हैं कि बाल्मीकि ना केवल पवित्र ग्रंथ रामायण के रचयिता हैं बल्कि हमारे सनातनी धर्म में उनकी पूजा भगवान की तरह करते हैं। मुनव्वर राणा के बयानों को देखें तो उन्होंने कहा था कि तालिबान भी दस साल बाद वाल्मीकि होंगें। हिंदू धर्म में तो किसी को भी भगवान कह देते हैं। वादी का आरोप था कि इस प्रकार राना ने न केवल हिंदू धर्म पर आक्रमण किया है वरन देश के दलित समाज, वाल्मीकि के अनुयायियों और भगवान वाल्मीकि के खिलाफ विष वमन किया है।
नेहा शाह





