लद्दाख में भूकंप के झटकों से सहमें लोग, 3.0 तीव्रता का आया भूकंप...
लद्दाख में भूकंप के झटकों से धरली हिली है. नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 3.0 मापी गई है. इससे पहले 6 मार्च को भी...

लद्दाख में भूकंप के झटकों से धरली हिली है. नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 3.0 मापी गई है. इससे पहले 6 मार्च को भी...
लद्दाख में भूकंप के झटकों से धरली हिली है. नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 3.0 मापी गई है. इससे पहले 6 मार्च को भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे. नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के अनुसार रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 3.6 थी. पिछले महीने 18 फरवरी को भी लद्दाख में सुबह-सुबह भूकंप आ गया था. तब रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 3.7 रही थी. हालांकि उस वक्त भी किसी नुकसान की खबर नहीं आई थी.
कोरोना वायरस महामारी के बीच लगभग रोजाना देश के किसी ना किसी राज्य में भूकंप के झटके महसूस किए जा रहे हैं. खास कर उत्तरी और पूर्वी भारत में लगातार भूकंप के झटके महसूस किए जा रहे हैं. इससे पहले मिजोरम में लगातार तीन दिनों तक भूकंप के झटके महसूस किए गए. इसके अलावा हरियाणा और दिल्ली के बाहरी इलाकों में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए.
भुकंप आने की वजह?
धरती चार परतों से बनी हुई है, इनर कोर, आउटर कोर, मैनटल और क्रस्ट. क्रस्ट और ऊपरी मैन्टल को लिथोस्फेयर कहते हैं. ये वर्गों में बंटी हुई एक मोटी परत है, जिन्हें टैकटोनिक प्लेट्स कहा जाता है। ये टैकटोनिक प्लेट्स अपनी जगह से हिलती रहती हैं लेकिन जब ये बहुत ज्यादा हिल जाती हैं, तो भूकंप आ जाता है. भूकंप की गहराई जितनी ज्यादा होगी सतह पर उसकी तीव्रता उतनी ही कम महसूस होगी.
अराधना मौर्या





