छात्रों की बुलंद आवाज छात्र छात्राओं ने दिया अपना समर्थन
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के समस्त छात्र छात्राओं ने आज मानविकी संकाय में पत्रकारों पर हो रहे रोज...

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के समस्त छात्र छात्राओं ने आज मानविकी संकाय में पत्रकारों पर हो रहे रोज...
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के समस्त छात्र छात्राओं ने आज मानविकी संकाय में पत्रकारों पर हो रहे रोज पुलिसिया जुर्म और एफ आई आर के खिलाफ संविधान की उद्देशिका का पाठ किया और मौन व्रत रखकर पत्रकारों को अपना नैतिक समर्थन दिया गौरतलब है कि किसान आंदोलन को कवर कर रहे तमाम छोटे-बड़े पत्रकारों पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की ओर से गैर जमानती धाराओं में कार्रवाई की गई है और स्वतंत्र पत्रकारो को जेल भेजा गया है। इन्हें सत्ता की कार्रवाइयों के खिलाफ आने वाले समय के पत्रकारों अर्थात पत्रकारिता के छात्रों ने बड़ी संख्या में मानविकी संकाय में इकट्ठा होकर अपना विरोध जताया और पत्रकारों की आवाज बुलंद की।
काशी विद्यापीठ के छात्रों ने पत्रकारों के खिलाफ हो रहे एफआइआर पर रखा मौन व्रत, पढ़ा संविधान की उद्देशिका
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में सोमवार को छात्रों ने देशभर में हो रहे पत्रकारों के खिलाफ अत्याचार व उन पर एफ आई आर से आहत होकर इस मुहिम को जन जन तक पहुंचाने के लिए विश्वविद्यालय परिसर के मानविकी संकाय के बाहर बड़ी संख्या में छात्रों ने संविधान की उद्देशिका का पाठ किया तथा स्वतंत्र पत्रकारों व उनकी पत्रकारिता पर हो रहे हमले को लेकर कड़ी निंदा की।
उनके समर्थन में 2 मिनट का मौन धारण भी किया।
आपको बता दें कि पूरे देश में किसान आंदोलन चल रहा है इस आंदोलन से जुड़ी हुई ज्यादातर खबरें स्वतंत्र पत्रकार ही उजागर कर रहे हैं जिससे सरकारी अमले में नाराजगी है। इसीलिए पत्रकार अब शासन के निशाने पर हैं उनके ऊपर एफआईआर कर शासकीय कार्रवाई की जा रही है जिसे लेकर देशभर में विरोध हो रहा है। पत्रकारों की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं ।
2020 में भारत में पत्रकारिता के स्वतंत्रता की एक रैंकिंग जारी हुई है जिसमें उसे 142 वां स्थान हासिल हुआ है जो पिछले साल की तुलना में और दयनीय स्थिति में पहुंच चुकी है इस आंदोलन को बल देने तथा उन पत्रकारों को समर्थन करने के लिए विद्यापीठ के पत्रकारिता विभाग के छात्रों ने बड़ी संख्या में एकजुट होकर एक साथ इसकी कड़ी निंदा की तथा उन्होंने पत्रकारों की तुरंत रिहाई व उनके ऊपर हो रहे फर्जी एफआईआर को अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बताया है जो स्वस्थ्य लोकतंत्र के लिए सही नहीं है।