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लोहता थाना बना आगन्तुक के लिए कोविड हेल्प डेस्क सेंटर महिला हेल्प डेस्क सेंटर आगन्तुक कक्ष पूरी तरह से होगा कम्प्यूटराइज्ड

लोहता थाना बना आगन्तुक के लिए कोविड हेल्प डेस्क सेंटर    महिला हेल्प डेस्क सेंटर आगन्तुक कक्ष पूरी तरह से होगा कम्प्यूटराइज्ड


लोहता : लोहता थाने पर आने वाले वादकारियों के लिए अब विशेष व्यवस्था करायी गयी। महिला हेल्प डेस्क स्थापित किया गया तो वहीं आगंतुकों के लिए कक्ष भी बनाया गया। यह फरमान डीजीपी के निर्देश पर किया गया है, इसके तहत एक रिसेप्शन काउंटर स्थापित किया गया है।

लोहता थानाध्यक्ष विश्वनाथ प्रताप सिंह ने बताया कि परिपत्र 36 के अनुसार ई स्थापना थाना लोहता में किया गया है जिसपर पर आठ-आठ घंटे की शिफ्ट में दो महिला आरक्षियों की तैनाती रहेगी। इस काउंटर पर पहुंच कर कोई भी वादकारी अपनी सारी समस्या बता कर उसका निदान करा सकता है। बताया कि महिलाओं को अपनी बात कहने में इस काउंटर पर काफी आसानी होगी।

थानों पर पहुंचने वाले काफी संख्या में वादकारी खास तौर से महिलाएं अपनी समस्या किससे कहे, इसको लेकर परेशान होते है। यदि वादकारी महिला हो तो उसके समक्ष अपनी समस्या कहने को लेकर काफी परेशानी होती है। जिसे देखते हुए थाने पर महिला हेल्प डेस्क व आगंतुक कक्ष की स्थापना किया गया है, जहां एक रिसेप्शन काउंटर बनाया गया है। जिस पर दो महिला आरक्षियों की ड्यूटी आठ-आठ घंटे की शिफ्ट में होगा। शासन के निर्देश के क्रम में जिन आरक्षियों की तैनाती की जाएगी वह व्यवहार कुशल व मृदुभाषी होगी। उसे प्रशिक्षण भी दिया जायेगा। आगंतुक कक्ष में बिजली,पंखा व पानी की व्यवस्था होगी। कक्ष में बैठने की पर्याप्त व्यवस्था होगी तो वहीं सीसी टीवी कैमरा भी लगा होगा। इसके साथ एक कर्मचारी की तैनाती होगी जो वादकारियों को पानी आदि पिलायेगा।

इतना ही नहीं वादकारी को शिकायत लिखने के लिए स्टेशनरी की भी व्यवस्था इस आगंतुक कक्ष में होगी। आगंतुक कक्ष थाने के प्रभारी के अधीन होगा और उच्चाधिकारी इसकी समीक्षा करेंगे।

महिला हेल्प डेस्क व आगंतुक कक्ष का रिसेप्शन पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत होगा। प्रशिक्षति महिला आरक्षियों द्वारा संचालित किया जायेगा।

थाने पर आने वाला हर आगंतुक व वादकारी सबसे पहले रिसेप्शन पर ही नियुक्त कर्मचारी द्वारा अटेंड किया जाएगा। कर्मचारी वादकारी का पूरा विवरण कंप्यूटर पर फीड करेगा। शिकायतकर्ता के प्रार्थना पत्र स्कैन कर फोल्डर में सुरक्षित रखे जाएगे और प्रत्येक प्रार्थना पत्र का टोकन नंबर होगा। जो शिकायतकर्ता व जांच अधिकारी को दिया जायेगा। शिकायकर्ता को शिकायती प्रार्थना पत्र प्राप्ति की रसीद भी दी जाएगी ताकि थाने पर हुई शिकायत को इधर-उधर नहीं किया जा सके।

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