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वैष्णों जन तो तेने कहिये जे पीर पराई जान रे

वैष्णों जन तो तेने कहिये जे पीर   पराई जान रे


अरुण कुमार मौर्य: बचपन एक्सप्रेस - बापू जी का पसंदीदा भजन जिसे वे हमेशा गुनगुनाया करते थे, इस भजन का मतलब है वैष्णों जन वही हो सकते है जो दूसरे की पीडा समझ सके | और गाँधी जी ने हमेशा अपने जीवन में अपने इन्ही सिद्धांतो और आदर्शो को बनाये रखने के लिए पूरा जीवन सीखने और प्रयोग में लगा दिया| गाँधी जी अपनी आत्म कथा में ऐसे अनेक प्रसंगो का वर्णन करते है जब उन्होंने गलत संगत में आकर गलत कार्य किये |पर उन्होंने अपने हर कार्य का प्रायश्चित किया चाहे वे जब अपने मित्रों के साथ मांसाहार किया हो या वे कई बार कस्तूरबा बा के ऊपर अपनी धौंस जमाने की कोशिश की हो | महात्मा अपनी जीवन की हर अच्छी -बुरी घटना का ईमानदारी से जिक्र करते है, और उस घटना ने उनके ऊपर क्या प्रभाव डाला इसका भी जिक्र करते है | महात्मा गाँधी को समझने के लिए हमें उनके पूरे जीवन की हर घटनाओं को समझना होगा क्योंकि महत्मा गाँधी ने अपने जीवन में घटित होने वाली हर घटना से एक व्रत लेते थे| कई बार वे बीमार होने पर भी डॉक्टर के कहे गए नियमों का पालन इस लिए नहीं करते थे की यह उनके सिद्धन्तो एव मूल्यों के खिलाफ होता था , जिसके साथ वे कोई भी समझौता नहीं करते थे | गाँधी जी ने अपने इन्ही व्रतों से ऐसे अनेक मार्ग निकाले जो आज भी प्रासंगिक है | गाँधी जी ने अहिंसा को सबसे बड़ा धर्म कहा पर इसके साथ बापू ने खुद पर हो रही हिंसा का विरोध करने को भी कहा | और विरोध करने का अहिंसात्मक तरीका भी बताया वह तरीका था 'सत्याग्रह' यह एक ऐसा तरीका था जिसके आगे हर किसी को झुकना पड़ जाता है ,और यह तरीका इतना कारगर सिद्ध हुआ कि आज भी जब कोई घटना होती है ,या सरकार जब जनता को नजरअंदाज कर कोई कार्य करती है तो लोग धरना , भूख हड़ताल , कैंडिल मार्च निकलते है और सरकार मजबूर हो जाती है, उन्हें जनता के आगे झुकना पड़ जाता है | ये ही अहिंसा की सबसे बड़ी शक्ति है | क्योंकि अहिंसा से शांति आती है, और आज जब दुनिया में आतंकवाद ,उग्रवाद या नस्लवाद , कट्टरपंथ का वातावरण हावी हो रहा है | तो ऐसे में शांति और अहिंसा ही एक मात्र रास्ता है, जो पूरी दुनिया में शांति और स्थिरता कायम कर सकता है |

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