माता का आगमन सब दुखों को हरने वाला हो

प्रो. गोविन्द जी पाण्डेय

माँ का आगमन ऐसे समय में हो रहा है जब हम सभी के उपर सदी की सबसे बड़ी विपदा आई हुई है | कई व्हाट्सएप सन्देश में सारे धर्म को बेकार बताया जाने लगा और विज्ञान को बेहतर साबित किया जाने लगा |

इसमें कोई शक नही की विज्ञान हमारे जीवन का उसी तरह अभिन्न अंग है जैसे धर्म है | धर्म और विज्ञान में प्रतिस्पर्धा की जरुरत नहीं है | विज्ञान से मिल रही सफलता को सरलता से पचाने का नाम धर्म है | अपनी लम्बी उड़ानों के बाद भी धरती पर बने रहना धर्म है |

सब कुछ होने के बाद भी अहंकार का न होना धर्मं है | विज्ञान से धन मिलता है और धर्म से शांति | विज्ञान से सोहरत मिलती है और धर्म से सदाचार | विज्ञान हमें बताता है की क्या है, धर्म हमें समझाता है क्या होना चाहिय | विज्ञान हमें एक रास्ते पर चलना सिखाता है धर्म हमें मंजिल पर जाने के कई रास्ते दिखाता है |

विज्ञान और धर्म एक दुसरे के पूरक है इनमे कोई वैर नही है | न तो विज्ञान धर्म के बिना पूरा होगा न ही धर्म विज्ञान के बिना | ये दोनों एक दुसरे के पूरक है | जहाँ विज्ञान रास्ता नहीं दिखाता वह धर्म उसका मार्गदर्शन करता है वही जब धर्म में अनाचार और अनैतिकता आती है तो विज्ञान उसे रास्ता दिखाता है |

विज्ञान ने हमें दुनिया के सारे सुख -साधन दिया पर धर्म के बिना इसका इस्तेमाल विध्वंसकारी हो जाएगा | विज्ञान के बड़े से बड़े महारथी भी एक समय के बाद धर्म को अपना लेते है | आतः इस विवाद में पड़ने की जरुरत नहीं है की विज्ञान जरुरी है या धर्म |

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