मकबूल फिल्म से मिली प्रशंसा -२००३

वैसे तो विशाल भारद्वाज का फ़िल्मी सफ़र १९८७ में बरगद दादा फिल्म में संगीत देने का साथ शुरू हो गया था पर जो प्रशंसा मिली वो शेक्सपियर के नाटक मैकबेथ के भारतीयकरन को लेकर रही \ मकबूल ने न सिर्फ हमें बॉलीवुड में एक नया निर्देशक दिया बल्कि कहानी को बताने का एक अलग अंदाज भी मिला \ मकबूल में लाइटिंग और एक्टिंग कमाल की है \ फ्रेम में काला और पीला के साथ लाल कलर हमें कुछ कुछ जर्मन अभिव्यंजनावाद (Expressnism) की याद दिला जाता है \

ओमकारा फिल्म का कमाल - 2006

मकबूल के बाद विशाल ने कई फिल्मे बनायीं पर उनको ऐसी सफलता नही मिली जैसी उन्होंने २००६ में एक बार फिर शेक्सपियर के नाटक ओथेलो पर आधारित ओमकारा बनायीं \ राजनीति और माफिया का ऐसा तिलस्म खड़ा किया की उसे छू पाना काफी मुश्किल है \ अजय देवगन और सैफ ने अपने जीवन के बड़े किरदार की तरह ओमकारा और लंगड़ा त्यागी की भूमिका निभायी है \

इश्किया फिल्म का कमाल सन २०१०

इश्किया फिल्म से विशाल ने अपने आपक को एक अलग श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया \ विशाल भारद्वाज की इस फिल्म ने महिला पात्र को केंद्र में लाकर खड़ा कर दिया जहा से भारतीय फिल्म इतिहास में महिला पात्रो की भूमिका में उल्लेखनीय बदलाव आ गया \ अपने पति से बदला और उसके लिए दो मर्दों का इस्तेमाल और उनसे अलग -अलग समय शारीरिक सम्बन्ध\ ये सब कुछ नया था \

डेढ़ इश्किया में माधुरी का कमाल २०१४

२०१४ में विशाल भारद्वाज ने दो कमाल की फिल्मे बनायीं \ एक डेढ़ इश्किया और दूसरी दृश्यम \ दोनों ही फिल्मे भारतीय फिल्म इतिहास की कुछ खास फिल्मों में से गिनी जायेंगी \ उसी कहानी को आधार बनाकर डेढ़ इश्किया ने महिला पात्र की भूमिका को पुनर्स्थापित किया \ ये फिल्म विशाल के कमाल और माधुरी, नसीर और अरशद के बेहतरीन अभिनय के लिए जानी जाती है \

हैदर में हेमलेट का मिश्रण

विशाल भारद्वाज के लिए २०१४ काफी खास था \ इस साल उनकी तीन फिल्मे डेढ़ इश्किया , दृश्यम , और हैदर ने कमाल कर दिया था \ कश्मीर और सुरक्षाबल को केंद में रख कर बनी इस फिल्म को उनकी खास फिल्मो में से एक कहा जा सकता है \ उनके साथ २००९ में कमीने में काम करने के बाद शाहिद कपूर ने अपने बाल छिलवा दिये थे इस पात्र के लिए \