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अब उत्तरप्रदेश में बाल अपराधियों की खैर नहीं

अब  उत्तरप्रदेश में बाल अपराधियों की खैर नहीं

योगी मंत्रिपरिषद ने लैंगिक अपराधों से बालकों को संरक्षण अधिनियम, 2012 (पाक्सो एक्ट) के अधीन न्यायालयों में प्रचलित आपराधिक वादों तथा बलात्कार से सम्बन्धित अपराधों के आपराधिक वादों के शीघ्र निस्तारण हेतु प्रदेश में 218 नियमित न्यायालयों की स्थापना का निर्णय लिया है।

इसके तहत लैंगिंक अपराधों से बालकों को संरक्षण अधिनियम, 2012 (पाक्सो एक्ट) के अधीन न्यायालयों में प्रचलित आपराधिक वादों तथा बलात्कार से सम्बन्धित अपराधों के आपराधिक वादों के शीघ्र निस्तारण हेतु भारत सरकार की गाइड लाइन की व्यवस्थानुसार मा0 उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 30 जून, 2019 को पाक्सो केसेज से सम्बन्धित जिलावार डाटा की स्थिति के आलोक में 74 एक्सक्लूसिव/डेडीकेटेड कोट्र्स पाक्सो एक्ट केसेज हेतु नियमित न्यायालय गठित किए जाने तथा शेष 144 नियमित कोट्र्स (प्राइमरी रेप केसेज के ट्रायल के साथ-साथ पाक्सो एक्ट केसेज का ट्रायल) कुल 74+144=218 नियमित अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के न्यायालय के गठन सम्बन्धी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है।

प्रत्येक न्यायालय पर 75 लाख रुपए प्रति वर्ष व्यय भार होगा। इसके सम्बन्ध में अनुमानित वित्तीय भार 75x218=16350 लाख रुपए प्रतिवर्ष होगा। बालकों एवं महिलाओं के विरुद्ध हो रही आपराधिक घटनाओं का तत्काल विवेचना कराकर सम्बन्धित आपराधिक मुकदमों को शीघ्रातिशीघ्र एवं त्वरित गति से निस्तारित कराकर दोषियों को दण्डित किए जाने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है

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