फोरेंसिक साइंस वीक 2026 में विद्यार्थियों ने किया जघन्य अपराधों के क्राइम सीन का सजीव प्रदर्शन
झाँसी। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम इंस्टीट्यूट ऑफ फोरेंसिक साइंस एंड क्रिमिनोलॉजी, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झाँसी द्वारा आयोजित इंटरनेशनल फोरेंसिक साइंस वीक 2026 – “ज्ञानप्रभा 2.0” के अंतर्गत विद्यार्थियों ने विभिन्न जघन्य अपराधों पर आधारित क्राइम सीन का सजीव एवं वैज्ञानिक प्रदर्शन किया। 21 से 26 सितंबर तक आयोजित किए जा रहे इस फोरेंसिक साइंस वीक का उद्देश्य विद्यार्थियों को वास्तविक अपराध घटनास्थल जैसी परिस्थितियों में वैज्ञानिक जांच, साक्ष्य संकलन, विश्लेषण एवं आधुनिक फोरेंसिक तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग से परिचित कराना है।
कार्यक्रम में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय ने विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए विभिन्न क्राइम सीन का अवलोकन किया और उनके प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि फोरेंसिक साइंस केवल पुस्तकों और प्रयोगशालाओं तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक सोच, सूक्ष्म अवलोकन और तार्किक विश्लेषण के माध्यम से न्याय व्यवस्था को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
कुलपति ने कहा कि एक अच्छे फोरेंसिक विशेषज्ञ की पहचान केवल तकनीकी ज्ञान से नहीं, बल्कि घटनास्थल पर मौजूद छोटी से छोटी जानकारी को वैज्ञानिक साक्ष्य के रूप में समझने की क्षमता से होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से नई तकनीकों को सीखने के साथ वैज्ञानिक जिज्ञासा, नैतिकता और साक्ष्यों की निष्पक्षता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों ने हत्या, सीरियल किलिंग, मनोरोगी अपराध, जघन्य अपराध और अन्य आपराधिक घटनाओं पर आधारित घटनास्थलों का रचनात्मक एवं वैज्ञानिक पुनर्निर्माण प्रस्तुत किया। इन मॉडलों के माध्यम से फिंगरप्रिंट, रक्त के धब्बे, जैविक एवं भौतिक साक्ष्य, डिजिटल तकनीक तथा अन्य फोरेंसिक संकेतकों के आधार पर अपराध की वैज्ञानिक जांच की प्रक्रिया प्रदर्शित की गई।
विद्यार्थियों ने यह भी दिखाया कि घटनास्थल पर मौजूद साक्ष्यों को किस प्रकार सुरक्षित किया जाता है, उनकी पहचान एवं दस्तावेजीकरण कैसे किया जाता है तथा वैज्ञानिक विश्लेषण के माध्यम से उन्हें अपराध की परिस्थितियों से कैसे जोड़ा जा सकता है। क्राइम सीन प्रदर्शन में विद्यार्थियों की रचनात्मकता के साथ उनकी तकनीकी समझ भी देखने को मिली।
इस अवसर पर विज्ञान संकाय के डीन प्रो. आलोक कुमार तथा इंजीनियरिंग संस्थान के निदेशक प्रो. डी.के. भट्ट की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। झाँसी फोरेंसिक साइंस लैब के एसएसओ श्री हेमंत कुमार तथा डॉ. अरविंद यादव ने विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए क्राइम सीन का निरीक्षण कर घटनास्थल की वैज्ञानिक जांच, साक्ष्य संरक्षण एवं आधुनिक फोरेंसिक तकनीकों के उपयोग संबंधी महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
कार्यक्रम का नेतृत्व संस्थान के समन्वयक डॉ. विजय कुमार यादव ने किया। आयोजन को सफल बनाने में डॉ. आकाश कुमार, श्री मुरली मनोहर यादव, श्री चंदन नामदेव, श्री आकाश मृत्युंजय तथा शोधार्थी अंकिता सिकोरिया का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
कार्यक्रम में अन्य विभागों से डॉ. यतेन्द्र मिश्रा, श्री प्रकाश चंद्र, डॉ राघवेन्द्र दीक्षित, अतीत विजय एवं डॉ. ऋषिकेश गुप्ता सहित शिक्षकों ने भी सहभागिता की। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को अंतर-विभागीय अकादमिक संवाद के साथ फोरेंसिक विज्ञान के व्यावहारिक पक्ष को समझने का अवसर प्रदान किया।
“ज्ञानप्रभा 2.0” के अंतर्गत आयोजित यह गतिविधि विद्यार्थियों के लिए प्रयोगात्मक शिक्षण का महत्वपूर्ण मंच बनी, जिसमें उन्होंने यह समझा कि आधुनिक अपराध जांच में वैज्ञानिक साक्ष्य, डिजिटल तकनीक और घटनास्थल के सूक्ष्म विश्लेषण का समन्वय कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।