कुलसचिव की अध्यक्षता में छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु महाविद्यालयों के लिए कार्यशाला आयोजित

Update: 2026-07-28 14:25 GMT



आजमगढ़। जनपद के उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजनाओं के प्रभावी, पारदर्शी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन के उद्देश्य से हरिऔध कला केंद्र, आजमगढ़ में महाविद्यालयों के प्राचार्यों एवं नोडल अधिकारियों के लिए कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला की अध्यक्षता महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने की। इसमें वित्तीय वर्ष एवं शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए संचालित छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजनाओं के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।

कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए कुलसचिव ने कहा कि छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजनाएं आर्थिक रूप से कमजोर एवं पात्र विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। सभी महाविद्यालय यह सुनिश्चित करें कि कोई भी पात्र छात्र-छात्रा योजना के लाभ से वंचित न रहे। उन्होंने निर्देश दिए कि आवेदन प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता, जिम्मेदारी और निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण कराई जाए तथा विद्यार्थियों के आवेदन एवं अभिलेखों का सावधानीपूर्वक सत्यापन किया जाए।

जिला समाज कल्याण अधिकारी वशिष्ठ नारायण सिंह ने योजनाओं की पात्रता, ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया, सत्यापन एवं शासन द्वारा निर्धारित समय-सारिणी की जानकारी देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश के मूल निवासी पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति, शैक्षणिक भत्ता एवं शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ प्रदान किया जाएगा। उन्होंने महाविद्यालयों को छात्रवृत्ति पोर्टल पर मास्टर डाटा, शुल्क विवरण एवं पाठ्यक्रम संबंधी सूचनाएं समय से अपडेट करने का आग्रह किया।

कार्यशाला में पावर पॉइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से आवेदन प्रक्रिया, पोर्टल संचालन, सत्यापन, त्रुटियों के निराकरण तथा शासन के दिशा-निर्देशों की विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही महाविद्यालयों से छात्रवृत्ति योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार कर अधिक से अधिक पात्र विद्यार्थियों तक इसकी जानकारी पहुंचाने का आह्वान किया गया।

कार्यक्रम में जनपद के विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्य, छात्रवृत्ति नोडल अधिकारी तथा समाज कल्याण विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। अंत में प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए योजनाओं के सफल एवं प्रभावी क्रियान्वयन के लिए समन्वित प्रयासों पर बल दिया गया।

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