सीएसजेएम विश्वविद्यालय में श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाई गई व्यास जयंती (गुरु पूर्णिमा)

Update: 2026-07-29 15:09 GMT


कानपुर, 29 जुलाई 2026।

कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के दीनदयाल शोध केंद्र में बुधवार को भगवान वेदव्यास जयंती (गुरु पूर्णिमा) का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं वैदिक परंपरा के अनुरूप विधि-विधान से मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महर्षि वेदव्यास के पूजन एवं पुष्पार्चन से हुआ। इस अवसर पर भारतीय ज्ञान परंपरा में गुरु की सर्वोच्च प्रतिष्ठा तथा महर्षि वेदव्यास के अप्रतिम योगदान का स्मरण करते हुए उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की गई।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने गुरु पूर्णिमा के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महर्षि वेदव्यास ने वेदों का संहिताकरण, महाभारत एवं अठारह पुराणों की रचना कर भारतीय ज्ञान-संपदा को व्यवस्थित रूप प्रदान किया। उन्होंने भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा को सुदृढ़ आधार प्रदान किया, जिसके कारण आज भी गुरु पूर्णिमा का पर्व ज्ञान, संस्कार एवं आत्मविकास के उत्सव के रूप में मनाया जाता है।

इस अवसर पर आचार्य डॉ. श्रवण कुमार द्विवेदी, श्री संगम बाजपेयी तथा दीनदयाल शोध केंद्र के निदेशक प्रो. डी. सी. श्रीवास्तव की गरिमामयी उपस्थिति रही। अपने संबोधन में प्रो. डी. सी. श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में गुरु केवल शिक्षा देने वाला नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा प्रदान करने वाला पथप्रदर्शक होता है। गुरु पूर्णिमा हमें ज्ञान, अनुशासन, सेवा एवं संस्कारों के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देती है।

कार्यक्रम में दीनदयाल शोध केंद्र द्वारा संचालित भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रमुख पाठ्यक्रमों में डिप्लोमा इन कर्मकाण्ड, स्नातकोत्तर डिप्लोमा इन वास्तुशास्त्र तथा स्नातकोत्तर ज्योतिर्विज्ञान के लगभग 100 विद्यार्थियों ने अत्यंत उत्साह एवं सक्रियता के साथ सहभागिता की। विद्यार्थियों ने गुरु वंदना, वैदिक मंत्रोच्चार तथा भारतीय संस्कृति से संबंधित विचार-विमर्श में भाग लेकर कार्यक्रम को भावपूर्ण एवं प्रेरणादायी बनाया।

समापन अवसर पर सभी विद्यार्थियों एवं उपस्थित जनों ने भारतीय संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रसार के प्रति अपने संकल्प को दोहराया। कार्यक्रम का वातावरण श्रद्धा, आध्यात्मिकता एवं सांस्कृतिक चेतना से परिपूर्ण रहा।

पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के छात्रों ने गुरु पुर्णिमा के महत्व को जाना

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में गुरु पूर्णिमा श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष डॉ. दिवाकर अवस्थी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में गुरु पूर्णिमा केवल शिक्षकों के सम्मान का पर्व नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाले सभी गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में पांच प्रकार के गुरु—माता, पिता, शिक्षक, आध्यात्मिक गुरु और परम गुरु—का विशेष स्थान होता है। माता प्रथम गुरु के रूप में संस्कार देती हैं, पिता जीवन में अनुशासन और संघर्ष का पाठ पढ़ाते हैं, शिक्षक ज्ञान एवं आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त करते हैं, आध्यात्मिक गुरु आत्मज्ञान की ओर प्रेरित करते हैं तथा महर्षि वेदव्यास, भगवान दत्तात्रेय और भगवान शिव जैसे परम गुरु दिव्य ज्ञान के स्रोत हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से सभी गुरुओं का सम्मान करने और उनके आदर्शों पर चलने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का समन्वय डॉ हरिओम कुमार ने किया । इस अवसर पर विभाग के छात्र-छात्राओं ने गुरु पूर्णिमा के महत्व को समझा तथा अपने गुरुओं के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की।

Similar News