बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर संगोष्ठी का आयोजन

Update: 2026-07-31 14:38 GMT


दिनांक - 31/07/2026

लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग द्वारा महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का मुख्य विषय "मुंशी प्रेमचंद एवं भारतीय पत्रकारिता" रहा, जिसमें साहित्य और पत्रकारिता के अंतर्संबंधों पर गहन विचार-विमर्श किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में विभागाध्यक्ष प्रोफेसर गोविंद जी पाण्डेय उपस्थित रहे। अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में प्रो. पाण्डेय ने साहित्य में निरंतर हो रहे भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के क्षरण पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, प्रेमचंद का साहित्य भारतीय जनमानस और सांस्कृतिक मूल्यों की वास्तविक धरोहर है। आज जब साहित्य और समाज में सांस्कृतिक क्षरण देखने को मिल रहा है, तब प्रेमचंद के विचार और अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। साहित्य और पत्रकारिता का आपस में गहरा और अटूट संबंध है; दोनों का ही मूल उद्देश्य समाज की सोई हुई चेतना को जगाना और सत्य की रक्षा करना है।

इस अवसर पर प्रोफेसर महेंद्र कुमार पाढ़ी ने प्रेमचंद की पत्रकारिता के निर्भीक स्वरूप और स्वतंत्रता संग्राम में उनके द्वारा संपादित पत्रिकाओं (हंस, जागरण आदि) की भूमिका पर प्रकाश डाला। डॉ. अरविंद कुमार सिंह ने प्रेमचंद के साहित्य में मौजूद यथार्थवाद और आम जन की समस्याओं के सजीव चित्रण को रेखांकित किया।

कुंवर सुरेंद्र बहादुर ने वर्तमान दौर की पत्रकारिता की चुनौतियों की तुलना प्रेमचंदकालीन पत्रकारिता के उच्च आदर्शों से की।डॉ. लोकनाथ ने प्रेमचंद की रचनाओं में निहित सामाजिक न्याय, किसान-मज़दूर चेतना और मानवीय संवेदनाओं पर विस्तार से बात की।

कार्यक्रम में विभाग के शोधार्थियों, स्नातक एवं स्नातकोत्तर के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया।

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