नई दिल्ली। त्रिदिवसीय श्रीमती कांति देवी जैन स्मृति सातवीं ऑनलाइन व्याख्यानमाला एवं परिचर्चा के अंतिम दिन वक्ताओं ने विश्व शांति, संवाद, अहिंसा, भारतीय संस्कृति और सामाजिक सद्भाव के विभिन्न पक्षों पर विचार व्यक्त किए। इस ऑनलाइन परिचर्चा में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों के साथ बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी के भास्कर इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म के विद्यार्थियों ने भी सहभागिता की और वक्ताओं के विचारों से लाभान्वित हुए।

कार्यक्रम के अंतिम दिन सीसीआरटी के अध्यक्ष विनोद नारायण इंदुरकर ने कहा कि भारत हमेशा से शांति का पक्षधर रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में कला और संस्कृति विश्व शांति स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। कला लोगों को जोड़ने और विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद स्थापित करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि भारत के संतों और महापुरुषों ने सदैव विश्व शांति का संदेश दिया है। ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भारतीय अवधारणा पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखने की प्रेरणा देती है।

उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष की परिस्थितियां बनी हुई हैं, कला और संस्कृति के माध्यम से आपसी समझ, सद्भाव और शांति का वातावरण विकसित किया जा सकता है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सामाजिक एवं राष्ट्रहित से जुड़ी गतिविधियों का भी उल्लेख किया।

तंजानिया से जुड़े देवेंद्र नाथ पाठक ने कहा कि भारत ने सदैव स्वयं शांति से रहने और दूसरों को भी शांति से जीने का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि संघर्षों के समाधान के लिए संवाद सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है और संवाद से ही स्थायी समाधान का रास्ता निकलता है। उन्होंने तंजानिया में भारतीय सांस्कृतिक गतिविधियों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े आयोजनों की जानकारी भी साझा की।

डॉ. संदीप शास्त्री ने युद्ध और संवाद को हिंसा एवं अहिंसा के संदर्भ में समझाते हुए कहा कि युद्ध हिंसा का प्रतीक है, जबकि संवाद अहिंसा का मार्ग है। उन्होंने अपने 44 वर्षों के अध्यापन अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि विद्यार्थियों से निरंतर सीखने का अवसर मिलता रहा। उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि अहिंसा शक्ति और साहस का प्रतीक है।

कार्यक्रम में रेखा यादव ‘निर्जर’ और डॉ. ए.के. वर्मा ने भी अपने विचार रखे। अध्यक्षीय उद्बोधन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक लक्ष्मी नारायण भाला ने दिया। कार्यक्रम की प्रस्तावना एवं विस्तृत जानकारी संपादक डॉ. अमित जैन ने प्रस्तुत की। मैथिली राव ने तीन दिवसीय व्याख्यानमाला का सार प्रस्तुत किया, जबकि प्रो. अवनीश ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में नेशनल मीडिया हेड हेमंत उपाध्याय का विशेष योगदान रहा।

त्रिदिवसीय ऑनलाइन व्याख्यानमाला में विभिन्न विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अन्य प्रतिभागियों ने सहभागिता की। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के भास्कर इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म के विद्यार्थियों की भागीदारी से उन्हें विश्व शांति, भारतीय सांस्कृतिक दृष्टि, संवाद, अहिंसा तथा वैश्विक सद्भाव जैसे विषयों पर विशेषज्ञों के विचार सुनने और समझने का अवसर मिला।