आजमगढ़/कुशीनगर, 26 सितंबर। महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय, आजमगढ़ के आतिथ्य एवं पर्यटन विभाग के छात्रों ने अंतरराष्ट्रीय बौद्ध स्थल कुशीनगर का शैक्षणिक भ्रमण किया। भ्रमण का उद्देश्य छात्रों को बौद्धकालीन इतिहास और पर्यटन प्रबंधन की व्यावहारिक जानकारी देना था।

विभाग प्रभारी डॉ. हिमांशु तिवारी के नेतृत्व में छात्रों ने महापरिनिर्वाण मंदिर में भगवान बुद्ध की 6.1 मीटर लंबी शयन मुद्रा की प्रतिमा के दर्शन किए। इसके बाद टीम रामाभार स्तूप पहुंची, जो बुद्ध के अंतिम संस्कार स्थल के रूप में पूज्य है। छात्रों ने माथा कुंअर मंदिर, बुद्ध संग्रहालय और थाई, जापानी, श्रीलंकाई व म्यांमार शैली में बने अंतरराष्ट्रीय बौद्ध मठों का भी अवलोकन किया। इस दौरान डॉ. वंदना गिरी और डॉ. मधुसूदन घोष भी साथ रहे।

डॉ. तिवारी ने बताया कि कुशीनगर बौद्ध सर्किट का हृदय है और पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। छात्रों ने स्थानीय विशेषज्ञों से उत्खनन, स्तूपों की स्थापत्य कला और विश्व धरोहर में कुशीनगर के महत्व को समझा। छात्रों ने कहा कि किताबी ज्ञान को प्रत्यक्ष देखना अद्भुत अनुभव रहा।

इस पहल पर कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने कहा, "हमारा लक्ष्य छात्रों को विरासत से जोड़ना है। कुशीनगर विश्व बौद्ध मानचित्र पर पूर्वांचल की पहचान है। ऐसे भ्रमण से छात्र कुशल पर्यटन पेशेवर बनेंगे। महाराजा सुहेल देव के नाम पर स्थापित यह विवि पूर्वांचल की विरासत को वैश्विक पटल पर ले जाने को प्रतिबद्ध है।"विश्वविद्यालय भविष्य में भी ऐसे भ्रमण जारी रखेगा।