आजमगढ़। बापू के सपने, गांव की अपनी दुकान — इसी संकल्प के साथ महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय, आजमगढ़ में 9 अक्टूबर को लगने वाले द्वितीय बापू बाजार मेला के लिए विश्वविद्यालय की टीम ने गांवों में जनसंपर्क की शुरुआत की है।

माननीय कुलपति प्रो. संजीव कुमार जी की प्रेरणा से बापू बाजार के समन्वयक प्रो. हसीन खान के नेतृत्व में टीम ने शनिवार को विश्वविद्यालय के आसपास के गांवों बिरदया खालसा, मित्तूपुर और परदेसी मोड़ में घर-घर दस्तक दी।

टीम ने ग्रामीणों से कहा — "यह केवल बाजार नहीं, बापू के स्वावलंबन के सपने को जीवित करने का अभियान है।" पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी इस मेले में स्थानीय कुम्हार, बुनकर, किसान और महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए गए उत्पाद सस्ती और किफायती दरों पर उपलब्ध होंगे। इसका मकसद गांव को बाजार से जोड़ना और ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाना है।

गांवों में बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक में मेले को लेकर खासा उत्साह देखा गया। ग्रामीणों ने कहा कि विश्वविद्यालय का गांव-गांव आकर आमंत्रण देना, शिक्षा और समाज को जोड़ने का एक सुंदर उदाहरण है।

इस प्रेरक अभियान में डॉ. रोहित पांडेय, भँवर लाल सेनचा, स्नेहा गोंड, आयुष वर्मा की टीम ने ग्रामीणों को गांधी जी के ग्राम स्वराज और आत्मनिर्भरता के संदेश से भी जोड़ा।