मानव अधिकारों के लिए सुरक्षित आवास जरूरी, विश्व वास्तुकला दिवस पर हुआ मंथन
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के गांधी ऑडिटोरियम में इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्चर एंड टाउन प्लानिंग द्वारा विश्व वास्तुकला दिवस मनाया गया। इस वर्ष की थी "मानव अधिकारों के लिए आवास : इसका निर्माण करें" (Housing for Human Rights: Build It) रही। कार्यक्रम में सुरक्षित, सम्मानजनक, समावेशी और सुलभ आवास की आवश्यकता के साथ मानव-केंद्रित एवं सतत वास्तुकला पर जोर दिया गया।
मुख्य अतिथि प्रो. सुनील कबिया ने कहा कि वास्तुकला केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन, समाज और पर्यावरण को बेहतर बनाने का माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों से ऐसी वास्तुकला विकसित करने का आह्वान किया, जिसमें सामाजिक संवेदनशीलता, पर्यावरणीय संतुलन और मानवीय जरूरतों को प्राथमिकता मिले।
विभागाध्यक्ष डॉ. सोमा अनिल मिश्रा ने कहा कि एक अच्छे वास्तुकार में तकनीकी दक्षता के साथ रचनात्मकता और सामाजिक दृष्टि भी आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को नवाचार और सतत विकास की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में वास्तुकला और मानव अधिकार, गुणवत्तापूर्ण आवास, सामाजिक समावेशन तथा मानव-केंद्रित डिजाइन जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
विद्यार्थियों की नृत्य, संगीत, नाट्य और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहीं। प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
इस अवसर पर एम.एस. खान, आर्कि. नीरज गुप्ता, आर्कि. संदीप कुमार मिश्रा, आर्कि. रैना गर्ग, आर्कि. अरविन सिंह, आर्कि. सुरजीत सिंह, आर्कि. प्रदीप कुमार यादव, आर्कि. अंकिता सिंह, आर्कि. राहुल पाठक, इंजी. देवेश पांडेय, राकेश नायक, विनय नरूला एवं सौरभ शर्मा सहित शिक्षक, कर्मचारी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम ने वास्तुकला, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों को एक मंच पर जोड़ते हुए विश्व वास्तुकला दिवस की थीम को सार्थक रूप से अभिव्यक्त किया