भूविज्ञान में देश-विदेश में रोजगार और शोध की अपार संभावनाएं : डॉ. प्रदीप सिंह


झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग में एलुमनाई टॉक एंड लेक्चर (ATAL) सीरीज–2026 के अंतर्गत द्वितीय व्याख्यान का आयोजन हाइब्रिड माध्यम से किया गया। कुलपति प्रो. मुकेश पांडे के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में आयोजित व्याख्यान का विषय ‘मैपिंग करियर पाथवेज़ : ऑपर्च्युनिटीज इन अर्थ साइंसेज एंड प्रोजेक्ट मैनेजमेंट’ रहा। इसमें विद्यार्थियों को भूविज्ञान के क्षेत्र में रोजगार, शोध एवं विदेश में उच्च शिक्षा की संभावनाओं से परिचित कराया गया।

मुख्य वक्ता काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी के डॉ. प्रदीप कुमार सिंह ने कहा कि भूविज्ञान का क्षेत्र अब पारंपरिक अध्ययन तक सीमित नहीं है, बल्कि अर्थ साइंसेज और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट के समन्वय से रोजगार एवं अनुसंधान की नई संभावनाएं विकसित हो रही हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को विषयगत ज्ञान के साथ तकनीकी दक्षता और प्रबंधन कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रो. अर्चना वर्मा, संयोजक ग्रीवेंस सेल एवं आईसीसी, ने विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की शिकायत निवारण व्यवस्था, उनके अधिकारों तथा समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया से अवगत कराया। उन्होंने विद्यार्थियों को उपलब्ध करियर विकल्पों की जानकारी देते हुए लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

व्याख्यान में जर्मनी से ऑनलाइन जुड़े काशी हिंदू विश्वविद्यालय के छात्र शिवम, जो वर्तमान में भूविज्ञान में परास्नातक कर रहे हैं, ने यूरोपीय देशों में उच्च शिक्षा के अवसरों की जानकारी साझा की और साथ ही वैश्विक अनुसंधान में भूविज्ञान की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में खाद्य प्रौद्योगिकी विभाग के प्रो. शिव कुमार कटियार ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। गणित एवं कंप्यूटर अनुप्रयोग विभाग के प्रो. अवनीश कुमार एवं डॉ. आशिक अहिरवार ने भी सहभागिता की। इस अवसर पर भूविज्ञान विभाग के वरिष्ठ संकाय सदस्य प्रो. एम.एम. सिंह, विभागाध्यक्ष एवं संयोजक प्रो. विनोद कुमार सिंह, डॉ. अमरजोत वर्मा तथा डॉ. नवीन चंद पटेल उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन एवं समन्वय डॉ. चेतन आनंद दुबे और इवेंट कोऑर्डिनेटर डॉ. प्रतिज्ञा पाठक ने किया। व्याख्यान के अंत में विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने प्रत्यक्ष एवं ऑनलाइन माध्यम से सहभागिता की।