झाँसी। आधुनिक और शिक्षित समाज में भी दहेज जैसी कुप्रथा का बने रहना गंभीर चिंता का विषय है। दहेज प्रथा न केवल महिलाओं के सम्मान और अधिकारों को प्रभावित करती है, बल्कि सामाजिक विकास में भी बड़ी बाधा है। इसके उन्मूलन के लिए समाज की सोच में बदलाव और युवाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

यह विचार बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झाँसी के महिला अध्ययन केंद्र एवं अर्थशास्त्र एवं वित्त विभाग के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को आयोजित दहेज विरोधी जागरूकता संगोष्ठी में वक्ताओं ने व्यक्त किए। कार्यक्रम का आयोजन कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय के मार्गदर्शन एवं महिला अध्ययन केंद्र की नोडल अधिकारी तथा हिंदी विभाग की सहायक आचार्य डॉ. अचला पाण्डेय के निर्देशन में किया गया।

संगोष्ठी में मुख्य वक्ता डॉ. राधिका चौधरी ने कहा कि आधुनिक युग में भी समाज ऐसी कुप्रथाओं में जकड़ा हुआ है, जो मानवीय गरिमा को ठेस पहुँचाती हैं। दहेज प्रथा महिलाओं के प्रति भेदभाव और उत्पीड़न को बढ़ावा देती है। उन्होंने कहा कि इस सामाजिक बुराई को समाप्त करने के लिए केवल कानून ही नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और मानसिकता में परिवर्तन भी आवश्यक है।

डॉ. निष्ठा व्यास ने कहा कि दहेज प्रथा महिलाओं के सम्मान और समानता की भावना के विरुद्ध है। बेटियाँ किसी परिवार पर बोझ नहीं, बल्कि परिवार और समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को समान अधिकार और सम्मान देकर ही एक स्वस्थ एवं प्रगतिशील समाज का निर्माण किया जा सकता है।

डॉ. सुमिरन श्रीवास्तव ने कहा कि दहेज जैसी कुप्रथाएँ समाज की प्रगति में बाधक हैं। जब तक समाज ऐसी रूढ़िवादी मानसिकता से मुक्त नहीं होगा, तब तक वास्तविक सामाजिक विकास संभव नहीं है। उन्होंने विद्यार्थियों से दहेज प्रथा के विरोध में आगे आने और समाज में सकारात्मक बदलाव के वाहक बनने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। विद्यार्थियों ने दहेज मुक्त समाज, महिला सम्मान और लैंगिक समानता से संबंधित जागरूकता पोस्टर प्रस्तुत कर सामाजिक परिवर्तन का संदेश दिया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. शिल्पा मिश्रा ने किया, जबकि अंत में श्री भूपेन्द्र मिश्रा ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर डॉ. प्रियंका अग्रवाल, डॉ. गजाला अहमद, डॉ. जूही गोविंदानी, डॉ. ज्योति चंदेल, डॉ. अमीषा माहुने, डॉ. बबीता सिंह, श्रीमती गुंजा चतुर्वेदी, प्रियल चतुर्वेदी, ऋतिक पटेल सहित शिक्षकगण उपस्थित रहे।

विद्यार्थियों में रुफिया अली, नैंसी यादव, सौम्या चौरसिया, ऋषिका अग्रवाल, वैष्णवी, अमन कुमार, प्रवीण सागर, अरुण चंदेल, हिमांशु, आदर्श, निधिका, आयुष सिंह, वर्षा दुबे, अनुज यादव, अनिकेत जैन, श्रुति प्रकाश, कशिश अग्रवाल, एकता सोलंकी, जेवा अंजाम सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की।