लखनऊ, 23 अक्टूबर 2026। ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ के निःशुल्क विधिक सहायता केंद्र द्वारा गैर-सरकारी संगठन AALI के सहयोग से ‘लैंगिकता एवं पितृसत्ता की समझ’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजय तनेजा के संरक्षण में किया गया।

इस अवसर पर कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने कहा, “शिक्षा का उद्देश्य समानता, संवेदनशीलता और न्याय के मूल्यों को मजबूत करना भी है। लैंगिक भेदभाव से मुक्त एवं समावेशी समाज के निर्माण में जागरूकता और संवाद की महत्वपूर्ण भूमिका है।”

कार्यक्रम का शुभारंभ विधि अध्ययन संकाय के अधिष्ठाता डॉ. पीयूष कुमार त्रिवेदी के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने विषय की सामाजिक प्रासंगिकता और विधिक जागरूकता के महत्व को रेखांकित किया।

कार्यशाला में विशेषज्ञ वक्ता सुश्री नेहा तिवारी एवं सुश्री मंतशा ने लैंगिक असमानताओं, पितृसत्तात्मक संरचनाओं तथा समाज में प्रचलित रूढ़ियों के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने समान अवसरों, व्यक्तिगत गरिमा और न्यायपूर्ण सामाजिक व्यवस्था को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। सत्र के दौरान प्रतिभागियों को लैंगिक भूमिकाओं एवं सामाजिक मान्यताओं का आलोचनात्मक विश्लेषण करने तथा भेदभावपूर्ण प्रथाओं को चुनौती देने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यशाला ने प्रतिभागियों को लैंगिक समानता के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित करने और समावेशी, समानतापूर्ण एवं न्यायपूर्ण समाज के निर्माण में अपनी भूमिका समझने का अवसर प्रदान किया।

कार्यक्रम के अंतर्गत प्रमाण-पत्र वितरण समारोह भी आयोजित किया गया। इस अवसर पर श्री अंशुल पांडेय, डॉ. प्रशांत वरुण, श्रीमती निधि सिंह राठौर, डॉ. राजकुमार परिछेता, डॉ. आराधना अस्थाना, डॉ. श्वेता त्रिवेदी एवं डॉ. मोहित मिश्रा उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन विधिक सहायता केंद्र के समन्वयक श्री अंशुल पांडेय ने किया, जबकि डॉ. दीक्षा मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।