भाषा विवि में सतत भविष्य के निर्माण के लिए वैज्ञानिकों और शोधार्थियों ने किया मंथन
ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ में शनिवार को सतत भविष्य की दिशा में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया तथा पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और खाद्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति एवं मुख्य संरक्षक प्रो. अजय तनेजा तथा विज्ञान संकाय की डीन एवं गृह विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. तहतीर फातिमा के मार्गदर्शन में दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर प्रो. तहतीर फातिमा ने स्वागत वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए अतिथि वक्ताओं, शोधार्थियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। विशेषज्ञ व्याख्यान सत्र में लखनऊ विश्वविद्यालय के प्राणी विज्ञान विभाग के प्रो. सुचित स्वरूप ने ‘जैव विविधता तथा पर्यावरणीय निरंतरता’ विषय पर व्याख्यान देते हुए जैव विविधता के संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन के महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं, आईटी कॉलेज के गृह विज्ञान विभाग की प्रो. रचना मिश्रा ने खाद्य सुरक्षा से जुड़े छिपे हुए खतरों के बारे में जानकारी साझा की। दोनों विशेषज्ञों ने अपने विषयों के विभिन्न पहलुओं से प्रतिभागियों को अवगत कराया।
विश्वविद्यालय के कुलपति एवं मुख्य संरक्षक प्रो. अजय तनेजा ने अध्यक्षीय उद्बोधन में वैज्ञानिक आयोजनों की प्रासंगिकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सतत भविष्य के निर्माण के लिए विज्ञान एवं अनुसंधान को जनकल्याण से जोड़ना आवश्यक है। ऐसे कार्यक्रम शोधार्थियों और विद्यार्थियों को नवीन वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने तथा समाज और पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों के समाधान की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित करते हैं। कार्यक्रम के अंत में आईटीएलएस (ITLS) एकेडमी के निदेशक इंजी. अखिलेश कुशवाहा ने अतिथियों, आयोजन मंडल और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में संयोजक मंडल के डॉ. दिलीप कुमार, डॉ. शालिनी राय और डॉ. रत्नेश सिंह तथा सह-संयोजक डॉ. कमलेश कुमार सोनी एवं डॉ. अभय कृष्णा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजन सचिवों में डॉ. नलिनी धस्माना, डॉ. आसिफ जाफरी, डॉ. अजय कुमार यादव, डॉ. शालिनी सिंह, डॉ. फराह दीबा, डॉ. मोहम्मद जाहिद, डॉ. कल्पना देवी, डॉ. कीर्तिमा सचान, डॉ. अंजली सिंह, डॉ. सिंपल कुमारी और डॉ. अनिल कुमार ने सक्रिय योगदान दिया।