कानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय ने पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में एक नई पहल की है। विश्वविद्यालय के सरस्वती गर्ल्स हॉस्टल में मंगलवार को बायोगैस संयंत्र का शुभारंभ कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने किया। इस संयंत्र के माध्यम से हॉस्टल की रसोई और मेस से निकलने वाले जैविक कचरे का उपयोग बायोगैस और जैविक खाद बनाने में किया जाएगा। इससे एक ओर कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण होगा, वहीं दूसरी ओर स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।

इस मौके पर कुलपति जी ने कहा कि विश्वविद्यालयों को पर्यावरण संरक्षण के ऐसे व्यावहारिक मॉडल विकसित करने चाहिए, जिन्हें दैनिक जीवन और संस्थागत व्यवस्था का हिस्सा बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि कचरे को समस्या के बजाय संसाधन के रूप में देखने की जरूरत है। रसोई से निकलने वाले जैविक कचरे को ऊर्जा में परिवर्तित करना पर्यावरण संरक्षण के साथ ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे नवाचारों से पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम करने और संसाधनों के बेहतर उपयोग का रास्ता खुलता है।

विश्वविद्यालय में स्थापित यह संयंत्र 'वेस्ट टू एनर्जी और वेस्ट टू वेल्थ' की अवधारणा पर आधारित है। इसकी क्षमता प्रतिदिन 25 से 50 किलोग्राम रसोई के जैविक कचरे के प्रसंस्करण की है। इससे प्रतिदिन लगभग 5 से 10 घन मीटर कच्ची बायोगैस का उत्पादन किया जा सकेगा। संयंत्र में स्टेनलेस स्टील 304 ग्रेड के मुख्य टैंक और फ्लोटिंग डोम मल्टी-चेंबर डाइजेस्टर तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसमें अवायवीय पाचन (एनारोबिक डाइजेशन) प्रक्रिया के माध्यम से जैविक कचरे से मीथेन युक्त बायोगैस तैयार होगी।

इस प्रक्रिया के बाद बचने वाले अर्धतरल पदार्थ को समृद्ध जैविक खाद के रूप में एकत्र किया जाएगा। इसका उपयोग पौधों के पोषण और कृषि कार्यों में किया जा सकेगा। इस प्रकार संयंत्र से कचरे का निस्तारण होने के साथ ऊर्जा और खाद, दोनों उपयोगी उत्पाद प्राप्त होंगे।

यह पहल विश्वविद्यालय के सस्टेनेबिलिटी मिशन का हिस्सा है। इसके माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा, जिम्मेदार उपभोग एवं उत्पादन, जलवायु कार्रवाई और सतत अपशिष्ट प्रबंधन जैसे संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को परिसर में व्यावहारिक रूप दिया जा रहा है। साथ ही विद्यार्थियों को नवीकरणीय ऊर्जा, सर्कुलर इकोनॉमी और पर्यावरण अनुकूल तकनीकों को नजदीक से समझने का अवसर मिलेगा।

कार्यक्रम में प्रो. वर्षा गुप्ता, डॉ. अजय पाण्डेय, मुख्य वार्डन प्रो. बीपी सिंह, श्रीमती ऐश्वर्या आर्य, डॉ. ममता तिवारी, डॉ. प्रशांत, डॉ. अरुण गुप्ता, डॉ. श्रवण कटियार, डॉ. रश्मि दुबे, डॉ. विशाल चंद्र और सुश्री तनिषा वाधवान सहित गर्ल्स एवं बॉयज हॉस्टल के वार्डन, विश्वविद्यालय के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

विश्वविद्यालय की यह पहल परिसर को स्वच्छ, हरित और पर्यावरण अनुकूल बनाने के संकल्प को आगे बढ़ाती है। इससे विद्यार्थियों को भी यह संदेश मिलेगा कि छोटे-छोटे प्रयासों और तकनीकी नवाचारों के माध्यम से कचरे को उपयोगी संसाधन में बदला जा सकता है।