दिल्ली में वकीलों की हड़ताल अनियंत्रित हुई

Update: 2019-11-05 05:25 GMT

पार्किंग विवाद को लेकर शुरू हुई हड़ताल अब आम आदमी को भी परेशान कर रही है। दिल्ली में कानून की रक्षा करने वाले वकील ही कानून तोड़ने पर आमादा है और उनको रोकने वाला कोई दिखाई नहीं दे रहा है।

संस्था कोई भी हो कानून से ऊपर नहीं होती अगर पुलिस वालों ने कोई गलती की है तो उसकी सजा उनको मिलनी चाहिए और इसका मतलब यह नहीं है कि वकील गुंडई करें और किसी को भी राह चलते पीट दें।

दिल्ली में कई ऐसे मामले देखने में आए हैं जिसमें वकीलों ने राह चलते लोगों को ना सिर्फ बेइज्जत किया है बल्कि उन को पीट भी दिया है इस तरह की घटना समाज में बढ़ते हताशा आक्रोश और लचर कानून व्यवस्था की ओर इशारा करती है।

आज वकीलों का ग्रुप एक ऐसे संगठन के तरह काम कर रहा है जहां वह सब कुछ मारपीट कर हासिल कर लेना चाहते हैं पुलिस प्रशासन लाचार है और नेता इसमें अपना नफा नुकसान देख रहे हैं। जिसको सबसे ज्यादा तकलीफ है वह आम आदमी है। एक ऑटो रिक्शे वाले को वकील लोगों के एक ग्रुप ने पकड़कर बुरी तरह पीट डाला।

अगर इस तरह की घटनाएं लगातार घटती रही तो वह समय दूर नहीं जब जनता संगठित होकर इन सभी लोगों को पीटने लगे।और अगर ऐसा हो गया तो सड़क पर न तो वकील दिखेंगे ना वह लोग जो संगठन के नाम पर आम आदमी को पीट रहे हैं।

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