भारत अब खुद बनाएगा छह स्टील्थ पनडुब्बियां, पांच विदेशी कंपनियों के साथ पार्टनरशिप.....
हिन्द महासागर में चीन का मुकाबला करने के लिए भारत छह स्टील्थ पनडुब्बियों का निर्माण खुद स्वदेशी प्रोजेक्ट-75आई के तहत करेगा। विदेशी सहयोग से घरेलू निर्माण के लिए 14 साल से लंबित 43 हजार करोड़ रुपये की इस परियोजना को आज औपचारिक रूप से मंजूरी मिल गई। इन पनडुब्बियों को नौसेना के बेड़े में शामिल होने में लगभग एक दशक लगेगा।
रणनीतिक भागीदारी मॉडल के तहत भारतीय नौसेना के लिए पी-75आई श्रेणी की 6 पनडुब्बियों का निर्माण 'मेक इन इंडिया' पहल के अनुरूप भारत में ही किया जाएगा। चीन की नौसेना की बढ़ती ताकत के मुकाबले ये पनडुब्बियां भारत की ताकत में इजाफा करेंगीं।
जानकारी के मुताबिक, ये छह कंवेनशनल पनडुब्बियां जरूर है लेकिन ये एआईपी यानी एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपेलशन सबमरीन है। इसका फायदा ये है कि इन्हें डीजल-इलेक्ट्रिक सबमरीन की तरह बार-बार समंदर से बाहर निकलने की जरूरत नहीं होगी।
यानी, एक तरह से ये स्टेल्थ-सबमरीन होंगी। रक्षा मंत्रालय ने जिन पांच विदेशी कंपनियों के साथ पार्टनरशिप में इन पनडुब्बियों को बनाने की मंजूरी दी है, उनमें रूस की रोसोबोरोनएक्सपोर्ट, फ्रांस की नेवल ग्रुप-डीसीएनएस, जर्मनी की थायसेनक्रूप, स्पेन की नोवंटिया और दक्षिण कोरिया की डेइवू कंपनी शामिल है।
नौसेना के पास वर्तमान में केवल 12 अन्य पुरानी डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां हैं, जिनमें से केवल आधी चालू हैं और अगले साल एक के सेवानिवृत्त होने की उम्मीद है। भारत के पास दो परमाणु-संचालित पनडुब्बियां आईएनएस अरिहंत और आईएनएस चक्र भी हैं, लेकिन आईएनएस चक्र के पास परमाणु-टिप वाली बैलिस्टिक मिसाइल नहीं है क्योंकि इसे रूस से पट्टे पर हासिल किया गया है।
अराधना मौर्या