हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर बहने वाली मोक्षदायिनी यमुना नदी के नवीनीकरण एवं सौंदर्यकरण का कार्य केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी नमामि गंगे परियोजना के तहत युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। इस परियोजना के तहत यमुना घाट को नया स्वरूप दिया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। इसी बीच स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने यमुना घाट पर वर्ष भर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। बताया जा रहा है कि गर्मियों के मौसम में यमुना घाट पर पानी सूख जाता है, जिससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना और स्नान के दौरान भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
नगर परिषद पांवटा साहिब के उपाध्यक्ष ओपी कटारिया ने बताया कि गर्मियों के दौरान यमुना नदी का अधिकांश पानी उत्तराखंड स्थित आसन बैराज नहर की ओर मोड़ दिया जाता है। इसके चलते यमुना घाट पर जलस्तर काफी नीचे चला जाता है और कई बार घाट पूरी तरह सूख जाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में यमुना घाट का नवीनीकरण किया जा रहा है, ऐसे में आवश्यक है कि घाट पर बारह महीने पानी उपलब्ध रहे। इस मांग को एसडीएम के माध्यम से प्रशासन तक पहुंचाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था को ध्यान में रखते हुए घाट पर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अलग से योजना और ठोस कार्य किया जाना चाहिए।